गुरु ही राष्ट्र निर्माता - नगर निगम सभागार में शिक्षक संगोष्ठी, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प, कत्थक नृत्य ने मोहा मन
*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट/शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला होती है और इस महान यज्ञ में ज्ञान का दीप जलाने वाले शिक्षक ही वास्तविक राष्ट्र निर्माता होते हैं। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए स्वयंसेवी संस्था *राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत परिवार* द्वारा रविवार को नगर निगम सभागार रायगढ़ में भव्य *स्व. श्री हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह* का आयोजन किया गया।
इस गरिमामय समारोह में छत्तीसगढ़ सहित भारत के अनेक राज्यों से आए हुए उत्कृष्ट, नवाचारी और सराहनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
*मंच पर अतिथि*
कार्यक्रम *श्री जगन्नाथ पाणिग्रही, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर ब्रेथवेट बर्न एंड जेसप कंस्ट्रक्शन कंपनी (BBJ) भारी उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार* के मुख्य आतिथ्य, *संजय अग्रवाल शिक्षाविद संस्थापक एन.आर. स्टील रायगढ़* की अध्यक्षता, *गुण निधि सतपथी शिक्षाविद रायगढ़ एवं डॉ. पूर्णानंद मिश्रा राष्ट्रीय अध्यक्ष शिक्षा अंजोर भारत* के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ।
*दीप प्रज्वलन और संगोष्ठी से हुई शुरुआत*
कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती, सरस्वती माता, छत्तीसगढ़ महतारी की पूजन-अर्चन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। तत्पश्चात अतिथियों ने स्व. श्री हरिवंश मिश्र जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें देशभर से तथा छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आए हुए शिक्षकों ने अपने द्वारा विद्यालय में किए जा रहे नवाचारों पर प्रकाश डाला। सभी शिक्षकों ने शिक्षा की गुणवत्ता में गुणोत्तर वृद्धि हेतु मैराथन चिंतन किया।
एक सम्मान - दो पौधों का संकल्प*
राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत परिवार द्वारा शिक्षकों के सम्मान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दिखाई गई। सभी सम्मानित शिक्षकों से दो पौधे लगाने का संकल्प लिया गया - *एक पौधा अपने सम्मान स्वर्गीय श्री हरिवंश मिश्रा भूतपूर्व प्रधान पाठक राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के नाम पर और दूसरा पौधा अपने माता या पूर्वजों के नाम पर* लगाकर उसकी देखरेख करने का संकल्प दिलाया गया।
अतिथियों के प्रेरक उद्बोधन*
राष्ट्रीय अध्यक्ष *डॉ. पूर्णानंद मिश्रा* ने संस्था के कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि संस्था द्वारा विगत कुछ वर्षों से शिक्षा, पर्यावरण एवं समाज के अन्य क्षेत्रों में कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को यह पुरस्कार दिया जा रहा है। इसके पूर्व बसना, सरायपाली, रायपुर में यह कार्यक्रम हो चुका है और यह चौथा कार्यक्रम नगर निगम सभागार रायगढ़ में आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि *जगन्नाथ पाणिग्रही* ने कहा - _"जिस समाज में शिक्षक का सम्मान होता है, वहां ज्ञान का प्रकाश कभी कम नहीं होता। आइए, हम सभी संकल्प लें कि शिक्षक का सम्मान केवल समारोह तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे व्यवहार और संस्कार का हिस्सा बने।"_ उन्होंने गुरु परम्परा पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान में गुरु की महत्ता को षड्यंत्र पूर्वक कम किए जाने की ब्रिटिश शासन की योजना पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
अध्यक्षता कर रहे *संजय अग्रवाल* ने कहा - _"मूर्ति इसलिए वंदनीय नहीं होती कि उसमें भगवान का वास होता है बल्कि इसलिए वंदनीय होती है कि वह तराशे जाने का दर्द सहा है, राष्ट्रीय अंजोर भारत का यह मंच आज ऐसे ही लोगों को सम्मानित कर रहा है जिन्होंने स्वयं अपने आप को ही नहीं बल्कि समाज के ऐसे अनेक लोगों को तराशा है।"_
विशिष्ट अतिथि *गुणनिधि सतपथी* ने कहा कि प्राचीन भारत में भी गुरु को अग्र पंक्ति में रखा गया। रोटी, कपड़ा, धरती, शिक्षा जीवन की आवश्यकता है, इनमें तीन की पूर्ति ईश्वर करता है किंतु चौथे की पूर्ति केवल गुरु द्वारा होती है।
कार्यक्रम में *अपूर्वा डड़सेना* द्वारा मनमोहक कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी गई, जिसने सभी का मन मोह लिया।
*इनका रहा विशेष सहयोग*
कार्यक्रम को सफल बनाने में अजय कुमार जायसवाल, उस्ताद अली, रामकुमार मैत्री, आनंद शर्मा, डीजेन्द्र कुर्रे, डॉ. प्रज्ञा सिंह, गायत्री मिश्रा, जितेन्द्र मिश्रा, मातली नंदन वर्मा, मनोज मुंच्छावड, मीनाक्षी शर्मा, मोहन लहरी, पीताम्बर मानिकपुरी, प्रेमचंद साव, पूनम सिंह साहू, रिंकल बग्गा, रीता पति, रोहित शर्मा, रूद्र नारायण तिवारी, शैलेन्द्र नायक, शैलेश प्रजापति, तरुण दास, आशा उज्जैनी, उर्मिला मिश्रा, डॉ. वीरेंद्र कर, योगेश सिंह ठाकुर, अंजनी मिश्रा, भूपेश पंडा, दीपा चौहान, गायत्री ठाकुर, हेमलता मिश्रा, यज्ञसेनी मिश्रा, कात्यायनी डडसेना, मीनाक्षी सरकार, निशा गौतम, रश्मि साहू, रीता श्रीवास्तव, रूपा भालाडहरे, शशि सरोज बैक, टेरेसा केरकेट्टा, विकास रंजन सिन्हा, सरविन्द सिदार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम का संचालन प्रथम सत्र में जिला संयोजक भूपेश पंडा एवं द्वितीय सत्र में व्याख्याता श्रीमती विजया पंडा ने किया, वहीं आभार प्रदर्शन जिलाध्यक्ष विकास रंजन सिन्हा ने किया।




















































