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फ़रवरी 08, 2022

दो दिवसीय सिरपुर महोत्सव 16 फरवरी से, तैयारी शुरू महासमुंद

फ़रवरी 08, 2022






दो दिवसीय सिरपुर महोत्सव 16 फरवरी से, तैयारी शुरू महासमुंद


गौरव चंद्राकर संस्कार न्यूज़ महासमुंद

महासमुंद संस्कार न्यूज़/ कलेक्टर श्री निलेश क्षीरसागर ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में समय सीमा की बैठक में सिरपुर महोत्सव के आयोजन के लिए की जा रही तैयारियों की समीक्षा की। सिरपुर महोत्सव का दो दिवसीय आयोजन 16 एवं 17 फरवरी को होगा। यह आयोजन कोरोना (कोविड-19) के संक्रमण से रोकथाम हेतु शासन के दिशा-निर्देशों के परिपालन को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

इस महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा विभिन्न विभागों के स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री सह-प्रदर्शनी से संबंधित स्टॉल लगाए जाएंगे। सिरपुर महोत्सव के आयोजन के लिए नोडल अधिकारी अतिरिक्त ज़िला दंडाधिकारी को बनाया गया है।  एसडीएम महासमुंद सहायक नोडल अधिकारी होंगे। सिरपुर महोत्सव आयोजन के सिलसिले में हुई बैठक में कलेक्टर श्री क्षीरसागर ने कहा कि समारोह में प्रस्तुत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम गरिमामय हो। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री विवेक शुक्ला, ठाकुर, अपर कलेक्टर श्री ओ.पी. कोसरिया, डॉ.नेहा कपूर, सहित विभिन्न विभागों के ज़िला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

  उन्होंने कहा कि मुख्य मंच को गरिमा अनुरूप आकर्षक रूप दिया जाए। व्यवस्थित ढंग से दुकानों का आबंटन किया जाए, साथ ही उन्होंने कहा कि पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग द्वारा सिरपुर के ऐतिहासिक स्थलों से संबंधित प्रदर्शनी एवं आने वाले पर्यटकों के लिए सूचना केंद्र भी स्थापित करने और ऐतिहासिक स्थलों के संबंध में जानकारी के लिए गाइड की भी व्यवस्था करने के संबंध में इन विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ली जाए। कलेक्टर ने विभागीय योजनाओं, गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी और प्रचार सामग्री वितरण करने कहा। स्व-सहायता समूह के बिक्री सह-प्रदर्शनी के लिए अन्य जिलों के उत्कृष्ट स्व-सहायता समूह एवं शिल्पकारों को आमंत्रित किया जाए। महोत्सव के दौरान आने वाले सांस्कृतिक दल एवं कलाकारों के लिए ठहराने तथा भोजन की व्यवस्था एवं प्रतीक चिन्ह आदि की व्यवस्था कर ली जाए।

   स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया जाएगा। इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकों की व्यवस्था के साथ ही एम्बुलेंस आदि की व्यवस्था की जाएगी। बैठक में जानकारी दी गई कि महिला बाल विकास, हाथकरघा, कृषि ,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, आयुर्वेद, ग्रामोद्योग, शिल्प बोर्ड, जिला पंचायत से संबंधित स्व-सहायता समूहों के बिक्री सह-प्रदर्शनी लगायेंगे।

    कलेक्टर ने कहा कि कार्यक्रम स्थल के लिए ले-आउट तैयार कर लिया जाए। यहां पर आने-जाने के लिए मार्ग पर्याप्त रूप से चौड़ा होना चाहिए, जिससे आवागमन में असुविधा न हो। यहां आने वाले लोगों के लिए पार्किंग, शौचालय, पेयजल आदि की व्यवस्था की जाए। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न सुविधाओं की देखरेख के लिए एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाए, जिनमें विद्युत मंडल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं अन्य संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल पर फायर ब्रिगेड, पेयजल टैंक, साफ-सफाई की व्यवस्था की जाए। उन्होंने पेयजल टैंकर का क्लोरीनेशन करने और ग्रामीणों को सस्ते भोजन की व्यवस्था के लिए दाल-भात केंद्र भी लगाने के निर्देश दिए। इसके अलावा राजस्व विभाग एवं पुलिस प्रशासन द्वारा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाने को कहा।



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फ़रवरी 06, 2022

महासमुंद जिला से यशवंत चौधरी ,पुष्पांजलि चौधरी एवं राजेश्वरी ध्रुवंशी बने शतरंज के राष्ट्रीय निर्णायक

फ़रवरी 06, 2022

महासमुंद जिला से यशवंत चौधरी ,पुष्पांजलि चौधरी एवं राजेश्वरी ध्रुवंशी बने शतरंज के राष्ट्रीय निर्णायक


संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर 9993 2572 95




पिथौरा संस्कार न्यूज़ /ऑल इंडिया चेस फेडरेशन की योजना चेस फ़ॉर एवरीवन जिसका प्रमुख उद्देश्य देश के सभी राज्यों  के प्रत्येक जिले से आर्बिटर तैयार कर जिला स्तर पर निर्णायकों को लेकर हो रही समस्याओं को दूर करना है ताकि प्रतियोगिता सुचारू रूप से कम  खर्चों में सपंन्न  हो सके । इसी तारतम्य में 30 जनवरी को शतरंज के वरिष्ठ निर्णायक व राष्ट्रीय निर्णायक के लिए ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी जिसमें महासमुंद जिला से यशवंत चौधरी (सराईपाली) पुष्पांजलि चौधरी (सराईपाली) व झलप से राजेश्वरी ध्रुवंशी शामिल हुई थी। पहले ही प्रयास पर तीनों ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है। इनकी इस उपलब्धि पर जिला शतरंज संघ के अध्यक्ष डॉ डी एन साहू ,उपाध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष बीजू पटनायक ,संयुक्त सचिव  डॉ मृणाल चंद्रसेन , राजेन्द्र मार्कण्डेय , श्रीमती डी साहू एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ के  सचिव हेमन्त खुटे ने बधाई दी है। उल्लेखनीय है कि तीनों निर्णायक  शिक्षा जगत से जुड़े हुए हैं।जिसका लाभ स्कूली बच्चों को मिलेगा । डॉ डी एन साहू ने बताया कि जिला शतरंज संघ के बैनर तले इन्हें सम्मानित किया जावेगा।



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सूचना के अधिकार के तहत जानकारी नहीं देने पर सचिव को अर्थदण्ड ग्राम पंचायत राजासेवैया खुर्द मामला पिथौरा

फ़रवरी 06, 2022

राज्य सूचना आयोग ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को कार्यवाही हेतु किया आदेशित


गौरव चंद्राकर संस्कार न्यूज़ महासमुंद

 पिथौरा /जनपद पंचायत पिथौरा के ग्राम पंचायत राजासेवैया खुर्द के तत्कालीन जन सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत सचिव दीनदयाल चौहान को विभिन्न सूचना के अधिकार से जानकारी नहीं देने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने 75000 रूपये का राशि अधिरोपित किया गया है । पूरा मामला वर्ष 2018-19 का है आवेदके योगेंद्रलाल डड़सेना निवासी ग्राम राजासेवैया खुर्द के द्वारा अपने ग्राम पंचायत राजासेवैया खुर्द के ग्राम पंचायत जन सूचना अधिकारी से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत शौचालय में मिट्टी मुरम की रायल्टी और पेंशन भुगतान के अलग-अलग जानकारी प्राप्त करने हेतु आवेदन किया था, किन्तु जन सूचना अधिकारी सचिव दिनदयाल चौहान के द्वारा जानकारी नहीं दिए जाने पर प्रथम अपील व द्वितीय अपील छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग रायपुर से की थी। मामले में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग रायपुर ने तीनों मामले में 25000-25000 हजार रुपये कर अर्थदंड अधिरोपित का दिनांक 23-12-2021 को आदेश किया है साथ ही आयोग द्वारा इस मामले में तत्कालीन सचिव के द्वारा वर्तमान सचिव को प्रभार देते समय सम्पूर्ण प्रभार नहीं दिये जाने एवं जानकारी प्रदान करने में असमर्थ ग्राम पंचायत की जांच करने के लिये मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत पिथौरा को छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग द्वारा कार्यवाही करने आदेश भी दिया गया है ।
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फ़रवरी 05, 2022

सरस्वती जन्मोउत्सव अर्थात बसंत पंचमी सरस्वती पूजन पर संतोष गुप्ता पिथौरा की विशेष रिपोर्ट

फ़रवरी 05, 2022
सरस्वती जन्मोउत्सव अर्थात बसंत पंचमी  सरस्वती पूजन पर संतोष गुप्ता पिथौरा की विशेष रिपोर्ट



       बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है । धार्मिक मान्यता अनुसार ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती धरती पर अवतरित होती है और लोगों की मनोकामनाएं पूरी करती है ।                        

          सजी धजी धरती ऐसे समय में बड़ी मनमोहक होती है । चारों ओर हरियाली, मखमली चादर ओढ़े ,प्यारी सुंदर सजी धरती मानो सोलह श्रृंगार की नज़र आती है जो नयनों के साथ तन मन को उल्लासित करती है । सुरभित वातावरण , भौरों के गुंजन के साथ विभिन्न  रंग बिरंगे फूलों से सजी धरती आम्र मंजरियों  में लगे छोटे छोटे आम फल पायल में लगे घुंघरुओं सा प्रतीत हो अपनी ओर आकर्षित कर रहे हो । इस समय विभिन्न प्रदेशों के लोग भिन्न भिन्न तरीकों से देवी की आराधना करते है ।
             धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्ञान की अधिष्ठात्री कलाओं की जननी माँ सरस्वती का जन्म बसंत पंचमी के दिन हुआ ।  बसंत पंचमी में पाँच तत्व ज्ञान ,अमृत , विद्या , बुद्धि और प्रकृति तत्व विद्यमान रहते है और इन्ही पाँच तत्वों का ज्ञान मय प्रकाश से माँ सरस्वती प्रगट होती है । जब हम सरस्वती का ध्यान करते है तब हमारे सामने कुंद पुष्प चंद्रमा तथा बर्फ माला के समान धवल श्वेत वस्त्र पहनी हुई हाथों में श्रेष्ठ वीणा धारण किये श्वेत कमलासन पर स्थित  दिखाई पड़ती है ।  ऐसी  देवी माँ सरस्वती की वंदना ब्रम्हा , विष्णु , महेश आदि देवता भी करते है श्वेत वर्मा ब्रम्हज्ञान के निष्कर्ष की परम आद्य स्वरूपा संसार व्यापिनी वीणा एवं पुस्तक को धारण की हुई अभय देने वाली जड़ता के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश में बदलने वाली समस्त संसार को सार श्रेष्ठ बुद्धि के प्रदाता भारती महाविद्या महावाणी सरस्वती आर्या , ब्रम्ही महाधेनु , वेदगर्भा , सुरेश्वरि , आदि नामों से जानी गई माँ सरस्वती की उत्पत्ति ब्रम्हा के शरीर से हुई है । इनका वर्ण गौर है । भुजाएँ चार है जिनमें से वीणा , पुस्तक , दण्ड कमल , एवं मुक्तमाला धारण किये रहती है । ये शरीर पर श्वेत वस्त्र धारण तथा मुकुट धारण करती है । इनका वाहन हँस व आसन कमल है । माँ सरस्वती के हाथ की वीणा जीवन संगीत , एवं सिद्धि मांगल्य नाद ब्रम्हा का सूचक है । हाथ में जो पुस्तक है वह सर्वज्ञानमयता का घोतक है । हाथ में जो माला है वह एकाग्रता एवं मातृका वर्ण शक्ति की सूचक है । इनके हाथ का कमल सृष्टि का प्रतीक है । 
        इनकी ज्ञान मुद्रा वागीश्वरी शक्ति सर्व व्यापकता का प्रतीक है । राजहँस नीर क्षीर विवेकत्त्व का प्रतीक है । मयूर शक्ति का बोधक है ।वागीश्वरी की कृपा से ही वाणी बुद्धि की प्रखरता प्रगट होती है । वाक तत्व , बुद्धि तत्व , ज्ञान तत्व , ओज तत्व की प्राप्ति माँ सरस्वती के अभाव में संभव नहीं ।बसंत पंचमी को माँ सरस्वती की पूजा की जाती है साथ ही बसंत के राजा कामदेव बसंत की देवी रति की भी पूजा की जाती है ।

माँ सरस्वती के महिमा का जितनी भी गुणगान करें कम है । पर जो मैंने संतो , महापुरुषों , ज्ञान , विज्ञान , स्कूलों में गुरुजनों से सुना वेद पुराणों के कथावाचकों से सुना उन्हीं बातों से संकलित , संचित आलेख में वर्णित है ।

         संतोष गुप्ता पिथौरा
सचिव श्रृंखला साहित्य मंच
 फोन - 9977960977
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बसंत पंचमी पर पत्रकार संघ ने किया मां सरस्वती की पूजा अर्चना सस्कार न्यूज़ का किया गया विमोचन पिथौरा

फ़रवरी 05, 2022

 



संस्कार न्यूज़ देव पटेल की रिपोर्ट

पिथौरा /  छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन पिथौरा के द्वारा आज स्थानीय रेस्टहाउस में बसंत पंचमी के महापर्व पर आज मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर पूजा अर्चना किया गया साथ ही संगठन के ही सक्रिय पत्रकार गौरव चंद्राकर द्वारा निर्मित वेब चैनल संस्कार न्यूज का विमोचन किया गया । जिसका विमोचन मुख्य अतिथि यूनियन के जिलाध्यक्ष बलराज नायडू जिला महासचिव आकाश अग्रवाल व संगठन के साथियों द्वारा किया गया विमोचन करते गौरव चंद्राकर ने कहा हमारी यह नई शुरुवात है चैनल के माध्यम से तेजी से खबरों का प्रकाशन होगा और प्रदेश में किसी की भी समस्या का 7 घंटों में प्रकाशन करने या उनकी समस्या को हल करने में प्रयासरत रहेंगे । जिलाध्यक्ष बलराज नायडू ने कहा यह नई शुरुवात है सभी पत्रकार साथियों को कदम से कदम मिलाकर चलना है और सभी का साथ देना है । जिला महासचिव आकाश अग्रवाल ने कहा संगठन हमारा परिवार और हम सबको एक परिवार की तरह रहना है । तत्पश्चात पत्रकारिता में सेवा दे रहे संगठन पत्रकारों का पेन व डायरी भेंट कर सम्मानित किया गया । इस अवसर जाकिर कुरैशी  गोविंद शर्मा संतोष गुप्ता रमेश सिन्हा ताराचंद पटेल रमेश श्रीवास्तव गौरव चंद्राकर ललित मुखर्जी साहस साव चंद्रशेखर प्रभाकर संतराम कुर्रे राजा शुक्ला राजेश साव देव पटेल संजय सिन्हा कमलेश डड़सेना राजकुमार अग्रवाल यशपाल मधुकर प्रीतम जोशी एवं पत्रकार साथी उपस्थित रहे ।

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फ़रवरी 03, 2022

दृढ़ संकल्प और विश्वास के साथ कार्य करने से सफलता अवश्य मिलती है : राज्यपाल सुश्री उइके

फ़रवरी 03, 2022

  



रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने युवाओं से कहा कि यदि वे दृढ़ संकल्प के साथ और मन में विश्वास लेकर कार्य करेंगे तो जीवन में हमेशा सफल होंगे। युवाओं को अपनी आकांक्षाओं के साथ ही राष्ट्र की सेवा और प्रगति के बारे में भी सोचना होगा। उन्होंने कहा कि डिग्री प्राप्त करना सिर्फ अच्छी तनख्वाह पाने वाले नौकरी के रूप में जाना जाए बल्कि देश की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए भी अपने ज्ञान का उपयोग करना चाहिए। उक्त उद्गार राज्यपाल ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नया रायपुर में आयोजित द्वितीय दीक्षांत समारोह में व्यक्त की। 

समारोह में उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, पूर्व निदेशक आई.आई.टी. खड़गपुर प्रोफेसर दामोदर आचार्य (वर्चुअल रूप से), सौरभ श्रीवास्तव बोर्ड के अध्यक्ष उपस्थित थे। अतिथियों ने 04 पीएचडी धारकों को, 11 एमटेक विद्यार्थियों को और 223 बी.टेक विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की। इसके अलावा उत्कृष्ट कार्य के लिए विद्यार्थियों को स्वर्ण एवं रजत पदक भी प्रदान किए गए। राज्यपाल ने डिग्री एवं पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को बधाई दी और कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है

जहां नवोदित और आदिवासी बाहुल्य राज्य में स्थापित संस्थान से उत्तीर्ण होकर राष्ट्र की सेवा के लिए विशेषज्ञ निकल रहे हैं। हम जानते हैं कि हमने बौद्धिक संपदा के दम पर पूरे विश्व में लोहा मनवाया है। सिंगापुर से सिलिकॉन वैली तक हमारे भारतीय ब्रांड एम्बेसडर रहे हैं, यहां तक कि विश्व के प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के मुखिया के रूप में भी हमारे भारतीय युवा नेतृत्व करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी युवाओं को देश का भविष्य मानते हैं और आत्मनिर्भर भारत और स्टार्टअप जैसी योजनाएं लागू कर सबकी बेहतरी के लिए प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. .पी.जे. अब्दुल कलाम के महान व्यक्तित्व और कार्यों को याद किया कि किस तरह अपनी सरलता और ज्ञान के दम पर वे लोगों के विशेषकर युवाओं के दिलों में राज करते रहे और उनसे अनेकों युवाओं ने प्रेरणा ली और जीवन में सफल हुए। राज्यपाल ने कहा कि डाटा एनालिसिस जैसी नये विधा का उपयोग, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण पर किया जा सकता है। इस पर शोध करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इमेजिंग का उपयोग कृषि में उत्पादन बढ़ाने के लिए करें और इस पर अध्ययन करें कि किन क्षेत्रों में कौन सी फसल बोई जा रही है, कौन सा क्षेत्र कितना सिंचित है

पिछले कुछ सालों में वनों का प्रतिशत कितना बढ़ा है या घटा है। उन्होंने कहा कि आपकी संस्था ने आसपास के जिन गांवों को गोद लिया है, उसे ऐसा तैयार करें कि उन्हें स्मार्ट विलेज के रूप में जाना जाए, वहां की अधिकतर व्यवस्थाएं आई.टी. पर आधारित हो और वहां के सभी नागरिक डिजिटल व्यवस्था के उपयोग के लिए जागरूक हो। दूरस्थ क्षेत्र के गांवों के स्कूली बच्चों को अपने कैंपस का भ्रमण कराएं और यहां पर पढ़ाये जाने वाले पाठ्यक्रम, नई विधा और तकनीक से बच्चों को परिचित कराएं ताकि उन बच्चों में ऐसे संस्थानों में पढ़ने की ललक जागे और वे यहां अध्ययन करने के लिए प्रेरित हों।

राज्यपाल ने कहा कि मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि संस्थान से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी मिली और कुछ विद्यार्थियों को उत्कृष्ट भारतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में भी उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश मिला। संस्थान द्वारा अपने विजन 2.0 को लागू करने के लिए भी कड़ी मेहनत की जा रही है, जिसमें ट्रिपल आई.टी. नवा रायपुर को कृषि, फारेस्ट्री और ग्रामीण विकास के लिए एक लाईव शोध प्रयोगशाला बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा स्थापना के छह वर्षों में ही उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की, जो कि सराहनीय है।

उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा कोविड महामारी के दौरान भी पढ़ाई प्रभावित नहीं हो इस संबंध में पूरी व्यवस्था की गई, जो कि सराहनीय है। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा भारत सरकार, छत्तीसगढ़ शासन सहित अनेक प्रतिष्ठित एजेंसियों से एम..यू. किया गया है। यहां के विद्यार्थियों ने कई इनोवेशन भी किए हैं। उन्होंने कहा कि आज के युग में तकनीकी शिक्षा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और डाटा एनालिसिस के सही उपयोग से समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

विद्यार्थियों को समाज की आधुनिक जरूरतों के हिसाब से अपने को तकनीकी रूप से तैयार करना होगा। उन्होंने प्रसन्नता जाहिर की कि यहां के विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करने का मौका मिल रहा है। समारोह को प्रोफेसर दामोदर आचार्य और सौरभ श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया। अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नया रायपुर के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार सिन्हा ने संस्थान का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। इस अवसर पर राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, प्राध्यापकगण और विद्यार्थी उपस्थित थे।

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