*बागबाहरा संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर।* छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की ऐतिहासिक 30 वीं औषधीय पौधा खोज यात्रा इस बार महासमुंद जिले बागबाहरा के वनांचल *भोथा-टेंगराही-हाथीबाहरा* के घने जंगलों में संपन्न हुई, प्राकृतिक संपदा से भरपूर और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध इस अंचल को खोज के लिए विशेष रूप से चुना गया था, 23 से 25 अक्टूबर तक चली तीन दिवसीय यात्रा में छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र और राजस्थान से आए 65 से अधिक विशेषज्ञों ने जंगल-जंगल भटक कर दुर्लभ जड़ी-बूटियों की रिसोर्स मैपिंग की।
*आयोजन स्थल - भोथा बना ज्ञान का केंद्र*
भोथा गांव इस पूरी यात्रा का मुख्य केंद्र रहा, जहां उद्घाटन सत्र, रात्रि विश्राम और समापन समारोह आयोजित हुआ, यहीं से प्रतिदिन दल टेंगराही और हाथीबाहरा के जंगलों में निकलता था, घने जंगल के बीच बसे हाथीबाहरा और टेंगराही के ग्रामीणों ने कहा - हम दिन-रात तस्करों से यहां की जड़ी-बूटियों और वन्य जीवों की रक्षा करते हैं, लेकिन सरकार को भी संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।
*100 से अधिक पौधों की पहचान*
दल ने अमलतास, गुड़सुखरी, शतावर, सफेद मूसली, काली मूसली, द्रोणपुष्पी, भालू ककई, छोटा गोखरू, नागबला, मरोड़ फली, बला-अतिबला, आंवला, सलेहा, कस्तूरी भिंडी, कुटज जैसे 100 से अधिक औषधीय पौधों की पहचान कर उनके गुणधर्मों पर चर्चा कर डॉक्यूमेंटेशन किया, जिसे विज्ञान सभा पुस्तिका के रूप में प्रकाशित करेगी।
*ये रहे मौजूद*
यात्रा का नेतृत्व अध्यक्ष विश्वास मेश्राम, टेक्सोनॉमिस्ट दिनेश कुमार, रतन गोंडाने, अंजू मेश्राम, वैद्य चमार राय नेताम, डॉ. एच एन टंडन, डॉ. विजय शर्मा, प्रो. विवेक दुबे, वैद्य अर्जुन लाल श्रीवास, महेंद्र कुमार सैनी, रुचिका मेंढे, नोएल गेडाम, गीतेश साहू, लक्ष्मीकांत अग्रवाल, खेमचंद चक्रधारी, विजय जगत, सर्वेश कौशिक, मनीषा टाइगर, मनीषा टेकाम, तुलाराम ठाकुर, अमर सिंह ठाकुर ने किया, समापन पर वैद्य चमार राय, संत कुमार, तुला राम नेताम का सम्मान हुआ, कोमाखान से अनुभा सिंह ठाकुर ने इसे पारंपरिक धरोहर सहेजने का अभियान बताया, संचालन डॉ. विजय शर्मा व आभार उषा मेश्राम ने किया।






