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मई 25, 2026

प्रांतीय घोष वर्ग का समापन : महासमुंद में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने प्रदर्शन में बिखेरी राष्ट्रभक्ति के सुरों की छटा*

मई 25, 2026
प्रांतीय घोष वर्ग का समापन : महासमुंद में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने प्रदर्शन में बिखेरी राष्ट्रभक्ति के सुरों की छटा*
प्रांतीय घोष वर्ग का समापन : महासमुंद में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने प्रदर्शन में बिखेरी राष्ट्रभक्ति के सुरों की छटा*
प्रांतीय घोष वर्ग का समापन : महासमुंद में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने प्रदर्शन में बिखेरी राष्ट्रभक्ति के सुरों की छटा*
प्रांतीय घोष वर्ग का समापन : महासमुंद में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने प्रदर्शन में बिखेरी राष्ट्रभक्ति के सुरों की छटा*

 जहां संगीत है वहां संवेदना है और जहां संवेदना है वहीं मानवता है : नारायण नामदेव



महासमुंद सस्कार न्यूज़ गौरव चद्राकर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) छत्तीसगढ़ प्रांत के 15 दिवसीय प्रांतीय घोष वर्ग (संगीत शिविर) का समापन रविवार को स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हुआ। 10 मई से शुरू हुए इस कड़े प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन स्वयंसेवकों ने एक से बढ़कर एक सुमधुर और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं का प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की इन प्रस्तुतियों से पूरा परिसर देशप्रेम के सुरों से गुंजायमान हो उठा।


समापन समारोह की अध्यक्षता महासमुंद जिला राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश जैन (बागबाहरा) ने की। कार्यक्रम में जिला संघ चालक महेश चंद्राकर बतौर अतिथि शामिल हुए, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता नारायण नामदेव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचार-पद्धति और कार्य विस्तार पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि, संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करना है। ईश्वर ने हमें मानव जीवन दिया है, जिसके लिए हमें कृतज्ञ होना चाहिए। हमारा मनुष्य जन्म इसलिए भी श्रेष्ठ है क्योंकि हमने भारत भूमि पर जन्म लिया है। मां भारती ने हमेशा महान संतों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया है। हमें विचार करना चाहिए कि हमारा जीवन भी उन्हीं महापुरुषों की तरह सार्थक बने। मनुष्य होने के साथ-साथ संघ का स्वयंसेवक होना हमारे लिए गौरव की बात है।  उन्होंने संगीत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संगीत का नाम सुनते ही हमारे भीतर उत्साह का संचार हो जाता है। भारतीय पारंपरिक संगीत मनुष्य के जीवन में अद्भुत ऊर्जा भरता है। हमारे देवी-देवताओं के हाथों में भी वाद्य यंत्र हैं, जो यह दर्शाते हैं कि संगीत जीवन को मधुर बनाता है। संगीत मन और बुद्धि को शुद्ध कर आनंदित करता है। स्वामी विवेकानंद, तानसेन और मीराबाई ने संगीत को ही अपना माध्यम बनाया था। संगीत से भक्ति, करुणा, वीरता और शांति के भाव पैदा होते हैं। भारतीय संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा है। यह लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है और तनाव, चिंता तथा थकान को मिटाता है। उन्होंने आगे कहा कि इन 15 दिनों में सभी शिक्षार्थियों ने कई कठिन रचनाएँ सीखी हैं। संघ का स्वयंसेवक जो ठान लेता है, उसे पूरा करके ही रहता है। मन को साधने का यह काम संघ की शाखाओं में होता है। संघ की 100 वर्षों की यात्रा सरल नहीं बल्कि बेहद कठिन रही है। अनेक कष्ट सहते हुए भी स्वयंसेवकों ने कार्य जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप आज देश भर में 90 हजार से अधिक शाखाएं लग रही हैं और संघ समाज में व्यवस्था लाने का कार्य कर रहा है।

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से 110 शिक्षार्थियों ने लिया हिस्सा

शाम ठीक 6 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित थे। पूर्ण अनुशासन और तालबद्धता के साथ जब स्वयंसेवकों ने कदमताल करते हुए वाद्यों की प्रस्तुति दी, तो उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया। इस प्रांतीय शिविर में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से चयनित 110 शिक्षार्थी स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। साथ ही, प्रशिक्षण को सफल बनाने में 18 प्रशिक्षक और 40 व्यवस्थापक स्वयंसेवक भी जुटे रहे।

पारंपरिक वाद्य यंत्रों की रचनाओं का किया सामूहिक वादन* 

शिविर के दौरान स्वयंसेवकों को संघ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों के वादन का कड़ा अभ्यास कराया गया था। समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से 'घोष' के अंतर्गत बांसुरी (वंशी), शंख, आनक (ड्रम) और प्रणव (साइड ड्रम) जैसे विभिन्न वाद्य यंत्रों पर संघ की तकनीकी व सुमधुर रचनाओं का शानदार प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की जुगलबंदी और सुरों के इस अद्भुत समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस राष्ट्रभक्ति से सराबोर कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और मातृशक्ति बड़ी संख्या में मौजूद थे।






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प्रांतीय घोष वर्ग का समापन : महासमुंद में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने प्रदर्शन में बिखेरी राष्ट्रभक्ति के सुरों की छटा*
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 जहां संगीत है वहां संवेदना है और जहां संवेदना है वहीं मानवता है : नारायण नामदेव



महासमुंद सस्कार न्यूज़ गौरव चद्राकर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) छत्तीसगढ़ प्रांत के 15 दिवसीय प्रांतीय घोष वर्ग (संगीत शिविर) का समापन रविवार को स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हुआ। 10 मई से शुरू हुए इस कड़े प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन स्वयंसेवकों ने एक से बढ़कर एक सुमधुर और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं का प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की इन प्रस्तुतियों से पूरा परिसर देशप्रेम के सुरों से गुंजायमान हो उठा।


समापन समारोह की अध्यक्षता महासमुंद जिला राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश जैन (बागबाहरा) ने की। कार्यक्रम में जिला संघ चालक महेश चंद्राकर बतौर अतिथि शामिल हुए, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता नारायण नामदेव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचार-पद्धति और कार्य विस्तार पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि, संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करना है। ईश्वर ने हमें मानव जीवन दिया है, जिसके लिए हमें कृतज्ञ होना चाहिए। हमारा मनुष्य जन्म इसलिए भी श्रेष्ठ है क्योंकि हमने भारत भूमि पर जन्म लिया है। मां भारती ने हमेशा महान संतों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया है। हमें विचार करना चाहिए कि हमारा जीवन भी उन्हीं महापुरुषों की तरह सार्थक बने। मनुष्य होने के साथ-साथ संघ का स्वयंसेवक होना हमारे लिए गौरव की बात है।  उन्होंने संगीत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संगीत का नाम सुनते ही हमारे भीतर उत्साह का संचार हो जाता है। भारतीय पारंपरिक संगीत मनुष्य के जीवन में अद्भुत ऊर्जा भरता है। हमारे देवी-देवताओं के हाथों में भी वाद्य यंत्र हैं, जो यह दर्शाते हैं कि संगीत जीवन को मधुर बनाता है। संगीत मन और बुद्धि को शुद्ध कर आनंदित करता है। स्वामी विवेकानंद, तानसेन और मीराबाई ने संगीत को ही अपना माध्यम बनाया था। संगीत से भक्ति, करुणा, वीरता और शांति के भाव पैदा होते हैं। भारतीय संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा है। यह लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है और तनाव, चिंता तथा थकान को मिटाता है। उन्होंने आगे कहा कि इन 15 दिनों में सभी शिक्षार्थियों ने कई कठिन रचनाएँ सीखी हैं। संघ का स्वयंसेवक जो ठान लेता है, उसे पूरा करके ही रहता है। मन को साधने का यह काम संघ की शाखाओं में होता है। संघ की 100 वर्षों की यात्रा सरल नहीं बल्कि बेहद कठिन रही है। अनेक कष्ट सहते हुए भी स्वयंसेवकों ने कार्य जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप आज देश भर में 90 हजार से अधिक शाखाएं लग रही हैं और संघ समाज में व्यवस्था लाने का कार्य कर रहा है।

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से 110 शिक्षार्थियों ने लिया हिस्सा

शाम ठीक 6 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित थे। पूर्ण अनुशासन और तालबद्धता के साथ जब स्वयंसेवकों ने कदमताल करते हुए वाद्यों की प्रस्तुति दी, तो उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया। इस प्रांतीय शिविर में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से चयनित 110 शिक्षार्थी स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। साथ ही, प्रशिक्षण को सफल बनाने में 18 प्रशिक्षक और 40 व्यवस्थापक स्वयंसेवक भी जुटे रहे।

पारंपरिक वाद्य यंत्रों की रचनाओं का किया सामूहिक वादन* 

शिविर के दौरान स्वयंसेवकों को संघ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों के वादन का कड़ा अभ्यास कराया गया था। समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से 'घोष' के अंतर्गत बांसुरी (वंशी), शंख, आनक (ड्रम) और प्रणव (साइड ड्रम) जैसे विभिन्न वाद्य यंत्रों पर संघ की तकनीकी व सुमधुर रचनाओं का शानदार प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की जुगलबंदी और सुरों के इस अद्भुत समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस राष्ट्रभक्ति से सराबोर कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और मातृशक्ति बड़ी संख्या में मौजूद थे।






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 जहां संगीत है वहां संवेदना है और जहां संवेदना है वहीं मानवता है : नारायण नामदेव



महासमुंद सस्कार न्यूज़ गौरव चद्राकर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) छत्तीसगढ़ प्रांत के 15 दिवसीय प्रांतीय घोष वर्ग (संगीत शिविर) का समापन रविवार को स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हुआ। 10 मई से शुरू हुए इस कड़े प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन स्वयंसेवकों ने एक से बढ़कर एक सुमधुर और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं का प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की इन प्रस्तुतियों से पूरा परिसर देशप्रेम के सुरों से गुंजायमान हो उठा।


समापन समारोह की अध्यक्षता महासमुंद जिला राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश जैन (बागबाहरा) ने की। कार्यक्रम में जिला संघ चालक महेश चंद्राकर बतौर अतिथि शामिल हुए, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता नारायण नामदेव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचार-पद्धति और कार्य विस्तार पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि, संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करना है। ईश्वर ने हमें मानव जीवन दिया है, जिसके लिए हमें कृतज्ञ होना चाहिए। हमारा मनुष्य जन्म इसलिए भी श्रेष्ठ है क्योंकि हमने भारत भूमि पर जन्म लिया है। मां भारती ने हमेशा महान संतों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया है। हमें विचार करना चाहिए कि हमारा जीवन भी उन्हीं महापुरुषों की तरह सार्थक बने। मनुष्य होने के साथ-साथ संघ का स्वयंसेवक होना हमारे लिए गौरव की बात है।  उन्होंने संगीत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संगीत का नाम सुनते ही हमारे भीतर उत्साह का संचार हो जाता है। भारतीय पारंपरिक संगीत मनुष्य के जीवन में अद्भुत ऊर्जा भरता है। हमारे देवी-देवताओं के हाथों में भी वाद्य यंत्र हैं, जो यह दर्शाते हैं कि संगीत जीवन को मधुर बनाता है। संगीत मन और बुद्धि को शुद्ध कर आनंदित करता है। स्वामी विवेकानंद, तानसेन और मीराबाई ने संगीत को ही अपना माध्यम बनाया था। संगीत से भक्ति, करुणा, वीरता और शांति के भाव पैदा होते हैं। भारतीय संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा है। यह लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है और तनाव, चिंता तथा थकान को मिटाता है। उन्होंने आगे कहा कि इन 15 दिनों में सभी शिक्षार्थियों ने कई कठिन रचनाएँ सीखी हैं। संघ का स्वयंसेवक जो ठान लेता है, उसे पूरा करके ही रहता है। मन को साधने का यह काम संघ की शाखाओं में होता है। संघ की 100 वर्षों की यात्रा सरल नहीं बल्कि बेहद कठिन रही है। अनेक कष्ट सहते हुए भी स्वयंसेवकों ने कार्य जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप आज देश भर में 90 हजार से अधिक शाखाएं लग रही हैं और संघ समाज में व्यवस्था लाने का कार्य कर रहा है।

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से 110 शिक्षार्थियों ने लिया हिस्सा

शाम ठीक 6 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित थे। पूर्ण अनुशासन और तालबद्धता के साथ जब स्वयंसेवकों ने कदमताल करते हुए वाद्यों की प्रस्तुति दी, तो उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया। इस प्रांतीय शिविर में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से चयनित 110 शिक्षार्थी स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। साथ ही, प्रशिक्षण को सफल बनाने में 18 प्रशिक्षक और 40 व्यवस्थापक स्वयंसेवक भी जुटे रहे।

पारंपरिक वाद्य यंत्रों की रचनाओं का किया सामूहिक वादन* 

शिविर के दौरान स्वयंसेवकों को संघ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों के वादन का कड़ा अभ्यास कराया गया था। समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से 'घोष' के अंतर्गत बांसुरी (वंशी), शंख, आनक (ड्रम) और प्रणव (साइड ड्रम) जैसे विभिन्न वाद्य यंत्रों पर संघ की तकनीकी व सुमधुर रचनाओं का शानदार प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की जुगलबंदी और सुरों के इस अद्भुत समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस राष्ट्रभक्ति से सराबोर कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और मातृशक्ति बड़ी संख्या में मौजूद थे।






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 जहां संगीत है वहां संवेदना है और जहां संवेदना है वहीं मानवता है : नारायण नामदेव



महासमुंद सस्कार न्यूज़ गौरव चद्राकर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) छत्तीसगढ़ प्रांत के 15 दिवसीय प्रांतीय घोष वर्ग (संगीत शिविर) का समापन रविवार को स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हुआ। 10 मई से शुरू हुए इस कड़े प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन स्वयंसेवकों ने एक से बढ़कर एक सुमधुर और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं का प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की इन प्रस्तुतियों से पूरा परिसर देशप्रेम के सुरों से गुंजायमान हो उठा।


समापन समारोह की अध्यक्षता महासमुंद जिला राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश जैन (बागबाहरा) ने की। कार्यक्रम में जिला संघ चालक महेश चंद्राकर बतौर अतिथि शामिल हुए, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता नारायण नामदेव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचार-पद्धति और कार्य विस्तार पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि, संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करना है। ईश्वर ने हमें मानव जीवन दिया है, जिसके लिए हमें कृतज्ञ होना चाहिए। हमारा मनुष्य जन्म इसलिए भी श्रेष्ठ है क्योंकि हमने भारत भूमि पर जन्म लिया है। मां भारती ने हमेशा महान संतों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया है। हमें विचार करना चाहिए कि हमारा जीवन भी उन्हीं महापुरुषों की तरह सार्थक बने। मनुष्य होने के साथ-साथ संघ का स्वयंसेवक होना हमारे लिए गौरव की बात है।  उन्होंने संगीत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संगीत का नाम सुनते ही हमारे भीतर उत्साह का संचार हो जाता है। भारतीय पारंपरिक संगीत मनुष्य के जीवन में अद्भुत ऊर्जा भरता है। हमारे देवी-देवताओं के हाथों में भी वाद्य यंत्र हैं, जो यह दर्शाते हैं कि संगीत जीवन को मधुर बनाता है। संगीत मन और बुद्धि को शुद्ध कर आनंदित करता है। स्वामी विवेकानंद, तानसेन और मीराबाई ने संगीत को ही अपना माध्यम बनाया था। संगीत से भक्ति, करुणा, वीरता और शांति के भाव पैदा होते हैं। भारतीय संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा है। यह लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है और तनाव, चिंता तथा थकान को मिटाता है। उन्होंने आगे कहा कि इन 15 दिनों में सभी शिक्षार्थियों ने कई कठिन रचनाएँ सीखी हैं। संघ का स्वयंसेवक जो ठान लेता है, उसे पूरा करके ही रहता है। मन को साधने का यह काम संघ की शाखाओं में होता है। संघ की 100 वर्षों की यात्रा सरल नहीं बल्कि बेहद कठिन रही है। अनेक कष्ट सहते हुए भी स्वयंसेवकों ने कार्य जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप आज देश भर में 90 हजार से अधिक शाखाएं लग रही हैं और संघ समाज में व्यवस्था लाने का कार्य कर रहा है।

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से 110 शिक्षार्थियों ने लिया हिस्सा

शाम ठीक 6 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित थे। पूर्ण अनुशासन और तालबद्धता के साथ जब स्वयंसेवकों ने कदमताल करते हुए वाद्यों की प्रस्तुति दी, तो उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया। इस प्रांतीय शिविर में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से चयनित 110 शिक्षार्थी स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। साथ ही, प्रशिक्षण को सफल बनाने में 18 प्रशिक्षक और 40 व्यवस्थापक स्वयंसेवक भी जुटे रहे।

पारंपरिक वाद्य यंत्रों की रचनाओं का किया सामूहिक वादन* 

शिविर के दौरान स्वयंसेवकों को संघ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों के वादन का कड़ा अभ्यास कराया गया था। समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से 'घोष' के अंतर्गत बांसुरी (वंशी), शंख, आनक (ड्रम) और प्रणव (साइड ड्रम) जैसे विभिन्न वाद्य यंत्रों पर संघ की तकनीकी व सुमधुर रचनाओं का शानदार प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की जुगलबंदी और सुरों के इस अद्भुत समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस राष्ट्रभक्ति से सराबोर कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और मातृशक्ति बड़ी संख्या में मौजूद थे।






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महासमुंद सस्कार न्यूज़ गौरव चद्राकर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) छत्तीसगढ़ प्रांत के 15 दिवसीय प्रांतीय घोष वर्ग (संगीत शिविर) का समापन रविवार को स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हुआ। 10 मई से शुरू हुए इस कड़े प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन स्वयंसेवकों ने एक से बढ़कर एक सुमधुर और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं का प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की इन प्रस्तुतियों से पूरा परिसर देशप्रेम के सुरों से गुंजायमान हो उठा।


समापन समारोह की अध्यक्षता महासमुंद जिला राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश जैन (बागबाहरा) ने की। कार्यक्रम में जिला संघ चालक महेश चंद्राकर बतौर अतिथि शामिल हुए, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता नारायण नामदेव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचार-पद्धति और कार्य विस्तार पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि, संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करना है। ईश्वर ने हमें मानव जीवन दिया है, जिसके लिए हमें कृतज्ञ होना चाहिए। हमारा मनुष्य जन्म इसलिए भी श्रेष्ठ है क्योंकि हमने भारत भूमि पर जन्म लिया है। मां भारती ने हमेशा महान संतों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया है। हमें विचार करना चाहिए कि हमारा जीवन भी उन्हीं महापुरुषों की तरह सार्थक बने। मनुष्य होने के साथ-साथ संघ का स्वयंसेवक होना हमारे लिए गौरव की बात है।  उन्होंने संगीत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संगीत का नाम सुनते ही हमारे भीतर उत्साह का संचार हो जाता है। भारतीय पारंपरिक संगीत मनुष्य के जीवन में अद्भुत ऊर्जा भरता है। हमारे देवी-देवताओं के हाथों में भी वाद्य यंत्र हैं, जो यह दर्शाते हैं कि संगीत जीवन को मधुर बनाता है। संगीत मन और बुद्धि को शुद्ध कर आनंदित करता है। स्वामी विवेकानंद, तानसेन और मीराबाई ने संगीत को ही अपना माध्यम बनाया था। संगीत से भक्ति, करुणा, वीरता और शांति के भाव पैदा होते हैं। भारतीय संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा है। यह लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है और तनाव, चिंता तथा थकान को मिटाता है। उन्होंने आगे कहा कि इन 15 दिनों में सभी शिक्षार्थियों ने कई कठिन रचनाएँ सीखी हैं। संघ का स्वयंसेवक जो ठान लेता है, उसे पूरा करके ही रहता है। मन को साधने का यह काम संघ की शाखाओं में होता है। संघ की 100 वर्षों की यात्रा सरल नहीं बल्कि बेहद कठिन रही है। अनेक कष्ट सहते हुए भी स्वयंसेवकों ने कार्य जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप आज देश भर में 90 हजार से अधिक शाखाएं लग रही हैं और संघ समाज में व्यवस्था लाने का कार्य कर रहा है।

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से 110 शिक्षार्थियों ने लिया हिस्सा

शाम ठीक 6 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित थे। पूर्ण अनुशासन और तालबद्धता के साथ जब स्वयंसेवकों ने कदमताल करते हुए वाद्यों की प्रस्तुति दी, तो उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया। इस प्रांतीय शिविर में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से चयनित 110 शिक्षार्थी स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। साथ ही, प्रशिक्षण को सफल बनाने में 18 प्रशिक्षक और 40 व्यवस्थापक स्वयंसेवक भी जुटे रहे।

पारंपरिक वाद्य यंत्रों की रचनाओं का किया सामूहिक वादन* 

शिविर के दौरान स्वयंसेवकों को संघ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों के वादन का कड़ा अभ्यास कराया गया था। समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से 'घोष' के अंतर्गत बांसुरी (वंशी), शंख, आनक (ड्रम) और प्रणव (साइड ड्रम) जैसे विभिन्न वाद्य यंत्रों पर संघ की तकनीकी व सुमधुर रचनाओं का शानदार प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों की जुगलबंदी और सुरों के इस अद्भुत समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस राष्ट्रभक्ति से सराबोर कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और मातृशक्ति बड़ी संख्या में मौजूद थे।





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मई 24, 2026

सपोस में आयोजित भव्य रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट का समारोह ऐतिहासिक माहौल में सम्पन्न हुआ।

मई 24, 2026
सपोस में आयोजित भव्य रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट का समारोह ऐतिहासिक माहौल में सम्पन्न हुआ।
सपोस में आयोजित भव्य रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट का समारोह ऐतिहासिक माहौल में सम्पन्न हुआ।
सपोस में आयोजित भव्य रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट का समारोह ऐतिहासिक माहौल में सम्पन्न हुआ।
सपोस में आयोजित भव्य रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट का समारोह ऐतिहासिक माहौल में सम्पन्न हुआ।

 कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब शामिल हुए


हजारों खेल प्रेमियों की भीड़ इस बात का प्रमाण है की ग्रीन सपोस का आयोजन पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है  - गुरु ख़ुशवंत साहेब





पिथौरा संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /सपोस में आयोजित भव्य रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल एवं इनाम वितरण समारोह ऐतिहासिक माहौल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद रूपकुमारी चौधरी ने की। वहीं अतिविशेष अतिथि के रूप में बसना विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल उपस्थित रहे। विशेष अतिथियों में जनपद अध्यक्ष ऊषा पुरषोत्तम घृतलहरे, जनपद उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल, बसना जनपद उपाध्यक्ष मोहित पटेल, बागबहरा जनपद उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार, पूर्व जनपद अध्यक्ष सतपाल सिंह छाबड़ा भाजपा जिला उपाध्यक्ष हरप्रसाद पटेल,कृष्णकुमार साहू , मंडल अध्यक्ष हलधर साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक मंचासीन रहे। 

अतिथियों ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर फाइनल मैच का शुभारंभ किया।फ़ाइनल मैच में ग्रीन सपोस ने रायगढ़ इलेवन को हराकर प्रथम 1 लाख 51000 रू नगद पुरुष्कार एवं ट्राफी पर नाम दर्ज किया वही उपविजेता रही रायगढ़ इलेवन को 80000 रुपये नगद एवं ट्राफी अतिथियों ने भेटकर पुरुष्कृत किया।शुभारंभ से पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि पुरषोत्तम घृतलहरे के नेतृत्व में मुख्य अतिथि गुरु खुशवंत साहेब का पारंपरिक एवं भव्य स्वागत किया गया। उन्हें अरसा रोटी से तौला गया तथा पंथी नृत्य, राउत नृत्य, गाजे-बाजे एवं आतिशबाजी के साथ फूलमालाओं से स्वागत किया गया। स्काउट गाइड के छात्रों ने सलामी देकर स्काउटिंग परंपरा के अनुरूप सम्मान प्रदान किया।

इनाम वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मैदान में उपस्थित हजारों खेलप्रेमियों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि ग्राम ग्रीन सपोस का आयोजन पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से खिलाड़ी यहां भाग लेने पहुंचते हैं, जो इस आयोजन की लोकप्रियता और खेल प्रतिभाओं के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सांसद रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ऐसे खेल आयोजन प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगे। बसना विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल ने कहा कि ग्राम ग्रीन सपोस हमेशा से बड़े आयोजनों के लिए प्रसिद्ध रहा है और आज प्रदेश के सर्वाधिक खेलप्रेमियों की उपस्थिति ने एक नया इतिहास रच दिया है।जनपद अध्यक्ष ऊषा पुरषोत्तम घृतलहरे ने कहा कि भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में ऐसे आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। वहीं जनपद उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए प्रत्येक व्यक्ति की दिनचर्या में खेल का विशेष महत्व होना चाहिए। कार्यक्रम का स्वागत भाषण जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि पुरषोत्तम घृतलहरे ने दिया। आभार प्रदर्शन सरपंच किशोर बघेल ने किया तथा मंच संचालन नरेंद्र बोरे द्वारा किया गया।

इस अवसर पर जनपद सदस्य कवलजीत सिंह छाबड़ा दिनेश अग्रवाल ,पुन्नी विष्णु साहू ,कंवलजीत छाबड़ा, हेमंत ठाकुर. निरंजन यादव सोसाइटी अध्यक्ष ,  सोसाइटी अध्यक्ष सोनू छाबड़ा , सोहन पटेल ,गणेश पटेल सोसाइटी अध्यक्ष,  बाबूलाल साव सोसाइटी अध्यक्ष , सैकड़ो सरपंच की उपस्थिति  ग्राम पंचायत सपोस सरपंच किशोर चंद बघेल, संतोष सिंह ठाकुर,नरोत्तम साहू हरिचरण प्रधान पुनीत राम टंडन जीवन दाता कमल रात्रि छगनलाल बनर्जी त्रिलोक सिंह ठाकुर वृंदावन बंजारा रवि बंजारा अश्वनी विशाल विकास बघेल सहित बड़ी संख्या में खेलप्रेमी, ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।


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सपोस में आयोजित भव्य रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट का समारोह ऐतिहासिक माहौल में सम्पन्न हुआ।

मई 24, 2026
सपोस में आयोजित भव्य रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट का समारोह ऐतिहासिक माहौल में सम्पन्न हुआ।
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 कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब शामिल हुए


हजारों खेल प्रेमियों की भीड़ इस बात का प्रमाण है की ग्रीन सपोस का आयोजन पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है  - गुरु ख़ुशवंत साहेब





पिथौरा संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /सपोस में आयोजित भव्य रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल एवं इनाम वितरण समारोह ऐतिहासिक माहौल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद रूपकुमारी चौधरी ने की। वहीं अतिविशेष अतिथि के रूप में बसना विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल उपस्थित रहे। विशेष अतिथियों में जनपद अध्यक्ष ऊषा पुरषोत्तम घृतलहरे, जनपद उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल, बसना जनपद उपाध्यक्ष मोहित पटेल, बागबहरा जनपद उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार, पूर्व जनपद अध्यक्ष सतपाल सिंह छाबड़ा भाजपा जिला उपाध्यक्ष हरप्रसाद पटेल,कृष्णकुमार साहू , मंडल अध्यक्ष हलधर साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक मंचासीन रहे। 

अतिथियों ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर फाइनल मैच का शुभारंभ किया।फ़ाइनल मैच में ग्रीन सपोस ने रायगढ़ इलेवन को हराकर प्रथम 1 लाख 51000 रू नगद पुरुष्कार एवं ट्राफी पर नाम दर्ज किया वही उपविजेता रही रायगढ़ इलेवन को 80000 रुपये नगद एवं ट्राफी अतिथियों ने भेटकर पुरुष्कृत किया।शुभारंभ से पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि पुरषोत्तम घृतलहरे के नेतृत्व में मुख्य अतिथि गुरु खुशवंत साहेब का पारंपरिक एवं भव्य स्वागत किया गया। उन्हें अरसा रोटी से तौला गया तथा पंथी नृत्य, राउत नृत्य, गाजे-बाजे एवं आतिशबाजी के साथ फूलमालाओं से स्वागत किया गया। स्काउट गाइड के छात्रों ने सलामी देकर स्काउटिंग परंपरा के अनुरूप सम्मान प्रदान किया।

इनाम वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मैदान में उपस्थित हजारों खेलप्रेमियों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि ग्राम ग्रीन सपोस का आयोजन पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से खिलाड़ी यहां भाग लेने पहुंचते हैं, जो इस आयोजन की लोकप्रियता और खेल प्रतिभाओं के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सांसद रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ऐसे खेल आयोजन प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगे। बसना विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल ने कहा कि ग्राम ग्रीन सपोस हमेशा से बड़े आयोजनों के लिए प्रसिद्ध रहा है और आज प्रदेश के सर्वाधिक खेलप्रेमियों की उपस्थिति ने एक नया इतिहास रच दिया है।जनपद अध्यक्ष ऊषा पुरषोत्तम घृतलहरे ने कहा कि भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में ऐसे आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। वहीं जनपद उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए प्रत्येक व्यक्ति की दिनचर्या में खेल का विशेष महत्व होना चाहिए। कार्यक्रम का स्वागत भाषण जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि पुरषोत्तम घृतलहरे ने दिया। आभार प्रदर्शन सरपंच किशोर बघेल ने किया तथा मंच संचालन नरेंद्र बोरे द्वारा किया गया।

इस अवसर पर जनपद सदस्य कवलजीत सिंह छाबड़ा दिनेश अग्रवाल ,पुन्नी विष्णु साहू ,कंवलजीत छाबड़ा, हेमंत ठाकुर. निरंजन यादव सोसाइटी अध्यक्ष ,  सोसाइटी अध्यक्ष सोनू छाबड़ा , सोहन पटेल ,गणेश पटेल सोसाइटी अध्यक्ष,  बाबूलाल साव सोसाइटी अध्यक्ष , सैकड़ो सरपंच की उपस्थिति  ग्राम पंचायत सपोस सरपंच किशोर चंद बघेल, संतोष सिंह ठाकुर,नरोत्तम साहू हरिचरण प्रधान पुनीत राम टंडन जीवन दाता कमल रात्रि छगनलाल बनर्जी त्रिलोक सिंह ठाकुर वृंदावन बंजारा रवि बंजारा अश्वनी विशाल विकास बघेल सहित बड़ी संख्या में खेलप्रेमी, ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।


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