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जुलाई 25, 2026

कुर्मी समाज और गांव का नाम रोशन: बावनकेरा की बेटी साक्षी चंद्राकर ने पहले प्रयास में NEET में प्राप्त किए 566 अंक

जुलाई 25, 2026

 झलप से रायपुर तक संघर्ष कर रचा इतिहास, डॉक्टर बनकर गांव की सेवा करना है सपना


*महासमुंद। संस्कार न्यूज़। गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट




महासमुंद सस्कार न्यूज़ /राष्ट्रीय परीक्षा में लहराया परचम महासमुंद जिला अंतर्गत ग्राम बावनकेरा झलप निवासी साक्षी चंद्राकर ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-2026 में शानदार सफलता प्राप्त कर पूरे क्षेत्र के साथ-साथ कुर्मी समाज का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

साक्षी ने 720 अंकों की इस प्रतियोगी परीक्षा में 566 अंक प्राप्त कर पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है। साक्षी, श्री नागेश चंद्राकर एवं श्रीमती गीता चंद्राकर* की सुपुत्री हैं। साक्षी के माता-पिता झलप बाजार में रेडीमेड कपड़े की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

झलप से रायपुर तक का संघर्षमय सफर

साक्षी की सफलता आसान नहीं थी। इसकी नींव संघर्ष से रखी गई। साक्षी ने अपनी स्कूली पढ़ाई झलप, बागबाहरा और रायपुर में रहकर पूरी की है। 

प्राथमिक शिक्षा गांव झलप में, आगे की पढ़ाई के लिए बागबाहरा* और फिर बेहतर तैयारी के लिए रायपुर  में रहकर पढ़ाई की। घर से दूर रहकर, सीमित संसाधनों में साक्षी ने न केवल पढ़ाई की बल्कि अपने सपने को भी जिंदा रखा।

साक्षी ने बताया कि _"रायपुर में रहकर कोचिंग और सेल्फ स्टडी दोनों करना पड़ता था। कई बार घर की याद आती थी, लेकिन माता-पिता का सपना और अपना लक्ष्य याद करके मेहनत करती थी।"_

मेहनत और संस्कार का संगम*

दुकान के काम के साथ पढ़ाई का संतुलन बनाना साक्षी के लिए बड़ी चुनौती थी। सुबह माता-पिता का हाथ बंटाना और रात तक पढ़ाई करना उसकी दिनचर्या बन गई थी। बचपन से ही डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करने का संकल्प रखने वाली साक्षी की लगन आज रंग लाई।

पिता श्री नागेश चंद्राकर ने गर्व से कहा _"हम एक सामान्य दुकानदार हैं। बेटी ने घर से दूर रहकर पढ़ाई की और पहले प्रयास में ही NEET क्लियर कर हमारा और पूरे समाज का नाम ऊंचा कर दिया।"_  

माता श्रीमती गीता चंद्राकर ने कहा _"बेटियों को पढ़ाने से पूरा घर और समाज आगे बढ़ता है। साक्षी ने यह साबित कर दिया।"_

समाज और गांव में खुशी की लहर*

साक्षी के शानदार परिणाम की खबर मिलते ही बावनकेरा झलप, बागबाहरा और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। कुर्मी समाज के पदाधिकारियों, शिक्षकों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने साक्षी के निवास पहुंचकर परिवार को बधाई दी।

समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि _"साक्षी ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो गांव की बेटियां भी किसी भी बड़े मुकाम को हासिल कर सकती हैं। यह अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा है।"_

*आगे का लक्ष्य: गांव की सेवा*

साक्षी का अगला लक्ष्य प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में MBBS में प्रवेश लेना है। साक्षी ने कहा _"मैं डॉक्टर बनकर सबसे पहले अपने झलप और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाना चाहती हूं। शहरों में तो सुविधाएं हैं, लेकिन गांवों में आज भी लोग इलाज के लिए भटकते हैं। मैं उनकी सेवा करना चाहती हूं।"_

साक्षी की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि संघर्ष और मेहनत से कोई भी मंजिल पाई जा सकती है।

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छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी

जुलाई 25, 2026
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी

महासमुंद में शुरू हुआ "सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान: आंगनबाड़ी बहनों से लेकर छात्राओं तक ने संभाला मोर्चा



*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने पूरे प्रदेश में *"ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान-2026* की शुरुआत की है। महिला एवं बाल विकास विभाग एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य सीमा पर ड्यूटी कर रहे सैनिकों का मनोबल बढ़ाना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।

क्या है "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान*

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास *श्री टिक्वेंद्र जटवार* ने बताया कि यह अभियान पूर्व सैनिक महासभा के सहयोग से संचालित एक गैर-राजनीतिक और राष्ट्रव्यापी देशभक्ति अभियान है। अभियान के तहत पूरे छत्तीसगढ़ से सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए 3 चीजें एकत्रित की जाएंगी: 

1.  *स्वनिर्मित मौली धागा और राखी* - रक्षाबंधन के प्रतीक के रूप में

2.  *सैनिक भाई के नाम शुभकामना पत्र* - जिसमें प्रेषक का नाम, पता और मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा

3.  *छत्तीसगढ़ की पावन मिट्टी* - विजय तिलक के लिए एक चुटकी मिट्टी

संग्रहित की गई यह सामग्री पूर्व सैनिकों की टीम द्वारा एकत्र कर *भारतीय सेना मुख्यालय, नई दिल्ली* तक पहुंचाई जाएगी। वहां से इसे देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक भिजवाया जाएगा।

*महासमुंद में व्यापक स्तर पर तैयारी*

महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद ने अभियान को सफल बनाने के लिए जिले भर में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने जिले की *आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, स्कूल-कॉलेज की छात्राओं, धार्मिक संगठनों और समस्त महासमुंदवासियों* से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में "सिपाही रक्षा सूत्र" तैयार करें।

श्री जटवार ने कहा कि प्रत्येक महतारी वंदन योजना की हितग्राही और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान की अग्रदूत बनें। घर-घर जाकर महिलाओं और बच्चों को इस अभियान से जोड़ें, ताकि हर घर से एक रक्षा सूत्र सीमा तक पहुंचे।

*इस तरह तैयार करें रक्षा-सूत्र का लिफाफा*

विभाग द्वारा लिफाफा तैयार करने की प्रक्रिया भी बताई गई है। एक छोटे लिफाफे में स्वनिर्मित राखी और मौली धागा रखें। साथ में सैनिक के नाम एक शुभकामना पत्र जोड़ें और उसमें अपना पूरा नाम, पता व मोबाइल नंबर अवश्य लिखें। अंत में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की एक चुटकी पैकेट में रखकर उसे बंद कर दें। यह पैकेट ही "सिपाही रक्षा सूत्र" कहलाएगा।

30 जुलाई अंतिम तिथि, इन केंद्रों पर करें जमा*

तैयार किए गए सभी रक्षा-सूत्र के लिफाफे *30 जुलाई 2026 तक* जमा किए जा सकते हैं। नागरिक अपने नजदीकी *आंगनबाड़ी केंद्र, एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय* या *जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, महासमुंद* के कार्यालय में लिफाफे जमा कर सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह छोटा सा प्रयास देश के प्रहरियों के हौसले को कई गुना बढ़ाएगा और आमजन व सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करेगा।


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छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी

जुलाई 25, 2026
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी

महासमुंद में शुरू हुआ "सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान: आंगनबाड़ी बहनों से लेकर छात्राओं तक ने संभाला मोर्चा



*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने पूरे प्रदेश में *"ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान-2026* की शुरुआत की है। महिला एवं बाल विकास विभाग एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य सीमा पर ड्यूटी कर रहे सैनिकों का मनोबल बढ़ाना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।

क्या है "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान*

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास *श्री टिक्वेंद्र जटवार* ने बताया कि यह अभियान पूर्व सैनिक महासभा के सहयोग से संचालित एक गैर-राजनीतिक और राष्ट्रव्यापी देशभक्ति अभियान है। अभियान के तहत पूरे छत्तीसगढ़ से सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए 3 चीजें एकत्रित की जाएंगी: 

1.  *स्वनिर्मित मौली धागा और राखी* - रक्षाबंधन के प्रतीक के रूप में

2.  *सैनिक भाई के नाम शुभकामना पत्र* - जिसमें प्रेषक का नाम, पता और मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा

3.  *छत्तीसगढ़ की पावन मिट्टी* - विजय तिलक के लिए एक चुटकी मिट्टी

संग्रहित की गई यह सामग्री पूर्व सैनिकों की टीम द्वारा एकत्र कर *भारतीय सेना मुख्यालय, नई दिल्ली* तक पहुंचाई जाएगी। वहां से इसे देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक भिजवाया जाएगा।

*महासमुंद में व्यापक स्तर पर तैयारी*

महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद ने अभियान को सफल बनाने के लिए जिले भर में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने जिले की *आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, स्कूल-कॉलेज की छात्राओं, धार्मिक संगठनों और समस्त महासमुंदवासियों* से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में "सिपाही रक्षा सूत्र" तैयार करें।

श्री जटवार ने कहा कि प्रत्येक महतारी वंदन योजना की हितग्राही और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान की अग्रदूत बनें। घर-घर जाकर महिलाओं और बच्चों को इस अभियान से जोड़ें, ताकि हर घर से एक रक्षा सूत्र सीमा तक पहुंचे।

*इस तरह तैयार करें रक्षा-सूत्र का लिफाफा*

विभाग द्वारा लिफाफा तैयार करने की प्रक्रिया भी बताई गई है। एक छोटे लिफाफे में स्वनिर्मित राखी और मौली धागा रखें। साथ में सैनिक के नाम एक शुभकामना पत्र जोड़ें और उसमें अपना पूरा नाम, पता व मोबाइल नंबर अवश्य लिखें। अंत में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की एक चुटकी पैकेट में रखकर उसे बंद कर दें। यह पैकेट ही "सिपाही रक्षा सूत्र" कहलाएगा।

30 जुलाई अंतिम तिथि, इन केंद्रों पर करें जमा*

तैयार किए गए सभी रक्षा-सूत्र के लिफाफे *30 जुलाई 2026 तक* जमा किए जा सकते हैं। नागरिक अपने नजदीकी *आंगनबाड़ी केंद्र, एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय* या *जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, महासमुंद* के कार्यालय में लिफाफे जमा कर सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह छोटा सा प्रयास देश के प्रहरियों के हौसले को कई गुना बढ़ाएगा और आमजन व सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करेगा।


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छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी

जुलाई 25, 2026
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी

महासमुंद में शुरू हुआ "सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान: आंगनबाड़ी बहनों से लेकर छात्राओं तक ने संभाला मोर्चा



*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने पूरे प्रदेश में *"ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान-2026* की शुरुआत की है। महिला एवं बाल विकास विभाग एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य सीमा पर ड्यूटी कर रहे सैनिकों का मनोबल बढ़ाना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।

क्या है "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान*

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास *श्री टिक्वेंद्र जटवार* ने बताया कि यह अभियान पूर्व सैनिक महासभा के सहयोग से संचालित एक गैर-राजनीतिक और राष्ट्रव्यापी देशभक्ति अभियान है। अभियान के तहत पूरे छत्तीसगढ़ से सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए 3 चीजें एकत्रित की जाएंगी: 

1.  *स्वनिर्मित मौली धागा और राखी* - रक्षाबंधन के प्रतीक के रूप में

2.  *सैनिक भाई के नाम शुभकामना पत्र* - जिसमें प्रेषक का नाम, पता और मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा

3.  *छत्तीसगढ़ की पावन मिट्टी* - विजय तिलक के लिए एक चुटकी मिट्टी

संग्रहित की गई यह सामग्री पूर्व सैनिकों की टीम द्वारा एकत्र कर *भारतीय सेना मुख्यालय, नई दिल्ली* तक पहुंचाई जाएगी। वहां से इसे देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक भिजवाया जाएगा।

*महासमुंद में व्यापक स्तर पर तैयारी*

महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद ने अभियान को सफल बनाने के लिए जिले भर में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने जिले की *आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, स्कूल-कॉलेज की छात्राओं, धार्मिक संगठनों और समस्त महासमुंदवासियों* से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में "सिपाही रक्षा सूत्र" तैयार करें।

श्री जटवार ने कहा कि प्रत्येक महतारी वंदन योजना की हितग्राही और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान की अग्रदूत बनें। घर-घर जाकर महिलाओं और बच्चों को इस अभियान से जोड़ें, ताकि हर घर से एक रक्षा सूत्र सीमा तक पहुंचे।

*इस तरह तैयार करें रक्षा-सूत्र का लिफाफा*

विभाग द्वारा लिफाफा तैयार करने की प्रक्रिया भी बताई गई है। एक छोटे लिफाफे में स्वनिर्मित राखी और मौली धागा रखें। साथ में सैनिक के नाम एक शुभकामना पत्र जोड़ें और उसमें अपना पूरा नाम, पता व मोबाइल नंबर अवश्य लिखें। अंत में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की एक चुटकी पैकेट में रखकर उसे बंद कर दें। यह पैकेट ही "सिपाही रक्षा सूत्र" कहलाएगा।

30 जुलाई अंतिम तिथि, इन केंद्रों पर करें जमा*

तैयार किए गए सभी रक्षा-सूत्र के लिफाफे *30 जुलाई 2026 तक* जमा किए जा सकते हैं। नागरिक अपने नजदीकी *आंगनबाड़ी केंद्र, एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय* या *जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, महासमुंद* के कार्यालय में लिफाफे जमा कर सकते हैं।

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छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी

जुलाई 25, 2026
छत्तीसगढ़ का गौरव: "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र अभियान-2026, सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगी राखी और मिट्टी

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*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने पूरे प्रदेश में *"ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान-2026* की शुरुआत की है। महिला एवं बाल विकास विभाग एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य सीमा पर ड्यूटी कर रहे सैनिकों का मनोबल बढ़ाना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।

क्या है "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान*

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास *श्री टिक्वेंद्र जटवार* ने बताया कि यह अभियान पूर्व सैनिक महासभा के सहयोग से संचालित एक गैर-राजनीतिक और राष्ट्रव्यापी देशभक्ति अभियान है। अभियान के तहत पूरे छत्तीसगढ़ से सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए 3 चीजें एकत्रित की जाएंगी: 

1.  *स्वनिर्मित मौली धागा और राखी* - रक्षाबंधन के प्रतीक के रूप में

2.  *सैनिक भाई के नाम शुभकामना पत्र* - जिसमें प्रेषक का नाम, पता और मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा

3.  *छत्तीसगढ़ की पावन मिट्टी* - विजय तिलक के लिए एक चुटकी मिट्टी

संग्रहित की गई यह सामग्री पूर्व सैनिकों की टीम द्वारा एकत्र कर *भारतीय सेना मुख्यालय, नई दिल्ली* तक पहुंचाई जाएगी। वहां से इसे देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक भिजवाया जाएगा।

*महासमुंद में व्यापक स्तर पर तैयारी*

महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद ने अभियान को सफल बनाने के लिए जिले भर में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने जिले की *आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, स्कूल-कॉलेज की छात्राओं, धार्मिक संगठनों और समस्त महासमुंदवासियों* से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में "सिपाही रक्षा सूत्र" तैयार करें।

श्री जटवार ने कहा कि प्रत्येक महतारी वंदन योजना की हितग्राही और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान की अग्रदूत बनें। घर-घर जाकर महिलाओं और बच्चों को इस अभियान से जोड़ें, ताकि हर घर से एक रक्षा सूत्र सीमा तक पहुंचे।

*इस तरह तैयार करें रक्षा-सूत्र का लिफाफा*

विभाग द्वारा लिफाफा तैयार करने की प्रक्रिया भी बताई गई है। एक छोटे लिफाफे में स्वनिर्मित राखी और मौली धागा रखें। साथ में सैनिक के नाम एक शुभकामना पत्र जोड़ें और उसमें अपना पूरा नाम, पता व मोबाइल नंबर अवश्य लिखें। अंत में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की एक चुटकी पैकेट में रखकर उसे बंद कर दें। यह पैकेट ही "सिपाही रक्षा सूत्र" कहलाएगा।

30 जुलाई अंतिम तिथि, इन केंद्रों पर करें जमा*

तैयार किए गए सभी रक्षा-सूत्र के लिफाफे *30 जुलाई 2026 तक* जमा किए जा सकते हैं। नागरिक अपने नजदीकी *आंगनबाड़ी केंद्र, एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय* या *जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, महासमुंद* के कार्यालय में लिफाफे जमा कर सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह छोटा सा प्रयास देश के प्रहरियों के हौसले को कई गुना बढ़ाएगा और आमजन व सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करेगा।


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जुलाई 25, 2026

महासमुंद में शुरू हुआ "सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान: आंगनबाड़ी बहनों से लेकर छात्राओं तक ने संभाला मोर्चा



*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने पूरे प्रदेश में *"ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान-2026* की शुरुआत की है। महिला एवं बाल विकास विभाग एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य सीमा पर ड्यूटी कर रहे सैनिकों का मनोबल बढ़ाना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।

क्या है "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान*

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास *श्री टिक्वेंद्र जटवार* ने बताया कि यह अभियान पूर्व सैनिक महासभा के सहयोग से संचालित एक गैर-राजनीतिक और राष्ट्रव्यापी देशभक्ति अभियान है। अभियान के तहत पूरे छत्तीसगढ़ से सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए 3 चीजें एकत्रित की जाएंगी: 

1.  *स्वनिर्मित मौली धागा और राखी* - रक्षाबंधन के प्रतीक के रूप में

2.  *सैनिक भाई के नाम शुभकामना पत्र* - जिसमें प्रेषक का नाम, पता और मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा

3.  *छत्तीसगढ़ की पावन मिट्टी* - विजय तिलक के लिए एक चुटकी मिट्टी

संग्रहित की गई यह सामग्री पूर्व सैनिकों की टीम द्वारा एकत्र कर *भारतीय सेना मुख्यालय, नई दिल्ली* तक पहुंचाई जाएगी। वहां से इसे देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक भिजवाया जाएगा।

*महासमुंद में व्यापक स्तर पर तैयारी*

महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद ने अभियान को सफल बनाने के लिए जिले भर में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने जिले की *आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, स्कूल-कॉलेज की छात्राओं, धार्मिक संगठनों और समस्त महासमुंदवासियों* से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में "सिपाही रक्षा सूत्र" तैयार करें।

श्री जटवार ने कहा कि प्रत्येक महतारी वंदन योजना की हितग्राही और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान की अग्रदूत बनें। घर-घर जाकर महिलाओं और बच्चों को इस अभियान से जोड़ें, ताकि हर घर से एक रक्षा सूत्र सीमा तक पहुंचे।

*इस तरह तैयार करें रक्षा-सूत्र का लिफाफा*

विभाग द्वारा लिफाफा तैयार करने की प्रक्रिया भी बताई गई है। एक छोटे लिफाफे में स्वनिर्मित राखी और मौली धागा रखें। साथ में सैनिक के नाम एक शुभकामना पत्र जोड़ें और उसमें अपना पूरा नाम, पता व मोबाइल नंबर अवश्य लिखें। अंत में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की एक चुटकी पैकेट में रखकर उसे बंद कर दें। यह पैकेट ही "सिपाही रक्षा सूत्र" कहलाएगा।

30 जुलाई अंतिम तिथि, इन केंद्रों पर करें जमा*

तैयार किए गए सभी रक्षा-सूत्र के लिफाफे *30 जुलाई 2026 तक* जमा किए जा सकते हैं। नागरिक अपने नजदीकी *आंगनबाड़ी केंद्र, एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय* या *जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, महासमुंद* के कार्यालय में लिफाफे जमा कर सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह छोटा सा प्रयास देश के प्रहरियों के हौसले को कई गुना बढ़ाएगा और आमजन व सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करेगा।

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जुलाई 24, 2026

अलका चंद्राकर: पुलिस को धमकी देना भूपेश की भाषायी दरिद्रता और हताशा का प्रतीक

जुलाई 24, 2026

 सत्ता की अकुलाहट में आपा खो बैठे भूपेश - अलका चंद्राकर ने साधा निशाना



*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर*/इस्पात मंत्रालय भारत सरकार की स्वतंत्र निदेशक और भारतीय जनता पार्टी पंचायत प्रकोष्ठ की प्रदेश सह कोषाध्यक्ष अलका चंद्राकर ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सोशल मीडिया पर पुलिस अधिकारियों और भाजपा नेताओं के खिलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर होने के बाद बघेल अपनी भाषायी मर्यादा और मानसिक संतुलन खो चुके हैं।

"फिर मिलेंगे" जैसी धमकी, अराजकता का प्रतीक*

अलका चंद्राकर ने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री का यह कहना कि _'पुलिस अधिकारी ध्यान रखें, भाजपा कुछ ही महीनों की मेहमान है... फिर मिलेंगे'_ यह कोई लोकतांत्रिक भाषा नहीं है। यह कानून के रक्षकों को खुलेआम डराने और धौंस जमाने की नाकाम कोशिश है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब कोई 'सिण्डिकेट' या 'कमिश्नर' राज नहीं चल रहा, बल्कि कानून और सुशासन का राज है।

*निष्पक्ष पुलिस पर अनर्गल आरोप*

भाजपा नेत्री ने कहा कि अपनी विफलता और कार्यकर्ताओं की अराजकता को छिपाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बघेल राज्य के निष्पक्ष पुलिस प्रशासन पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। दिन-रात जनता की सुरक्षा में तैनात वर्दीधारियों को धमकी देना बघेल की अलोकतांत्रिक सोच और भाषायी दरिद्रता को उजागर करता है। कांग्रेस के शासनकाल में जिस प्रकार कानून-व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ाई गईं, उस मानसिकता से कांग्रेस आज भी बाहर नहीं निकल पाई है।

*जनता ने नकारा, अब संस्थाओं पर बौखलाहट*

अलका चंद्राकर ने कहा कि जब भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा अराजकता फैलाए जाने पर पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करती है, तो भूपेश बघेल कानून के रक्षकों को ही कठघरे में खड़ा करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें उनके कारनामों और भ्रष्टाचार के कारण नकार कर विपक्ष में बैठाया है। अब धमकियों और खोखली बयानबाजी से छत्तीसगढ़ की शांतिप्रिय जनता या हमारी निष्पक्ष पुलिस व्यवस्था डरने वाली नहीं है।

*सरकार किसी उपद्रवी को नहीं बख्शेगी*

प्रदेश सह कोषाध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसी भी उपद्रवी को नहीं बख्शेगी, चाहे वह किसी भी दल से जुड़ा हो। पुलिस बल पूरी निष्पक्षता से अपना काम कर रहा है और आगे भी करता रहेगा। पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी मर्यादा याद रखनी चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं को धमकाने से बाज आना चाहिए।


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