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जुलाई 24, 2026

अलका चंद्राकर: पुलिस को धमकी देना भूपेश की भाषायी दरिद्रता और हताशा का प्रतीक

जुलाई 24, 2026

 सत्ता की अकुलाहट में आपा खो बैठे भूपेश - अलका चंद्राकर ने साधा निशाना



*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर*/इस्पात मंत्रालय भारत सरकार की स्वतंत्र निदेशक और भारतीय जनता पार्टी पंचायत प्रकोष्ठ की प्रदेश सह कोषाध्यक्ष अलका चंद्राकर ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सोशल मीडिया पर पुलिस अधिकारियों और भाजपा नेताओं के खिलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर होने के बाद बघेल अपनी भाषायी मर्यादा और मानसिक संतुलन खो चुके हैं।

"फिर मिलेंगे" जैसी धमकी, अराजकता का प्रतीक*

अलका चंद्राकर ने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री का यह कहना कि _'पुलिस अधिकारी ध्यान रखें, भाजपा कुछ ही महीनों की मेहमान है... फिर मिलेंगे'_ यह कोई लोकतांत्रिक भाषा नहीं है। यह कानून के रक्षकों को खुलेआम डराने और धौंस जमाने की नाकाम कोशिश है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब कोई 'सिण्डिकेट' या 'कमिश्नर' राज नहीं चल रहा, बल्कि कानून और सुशासन का राज है।

*निष्पक्ष पुलिस पर अनर्गल आरोप*

भाजपा नेत्री ने कहा कि अपनी विफलता और कार्यकर्ताओं की अराजकता को छिपाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बघेल राज्य के निष्पक्ष पुलिस प्रशासन पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। दिन-रात जनता की सुरक्षा में तैनात वर्दीधारियों को धमकी देना बघेल की अलोकतांत्रिक सोच और भाषायी दरिद्रता को उजागर करता है। कांग्रेस के शासनकाल में जिस प्रकार कानून-व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ाई गईं, उस मानसिकता से कांग्रेस आज भी बाहर नहीं निकल पाई है।

*जनता ने नकारा, अब संस्थाओं पर बौखलाहट*

अलका चंद्राकर ने कहा कि जब भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा अराजकता फैलाए जाने पर पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करती है, तो भूपेश बघेल कानून के रक्षकों को ही कठघरे में खड़ा करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें उनके कारनामों और भ्रष्टाचार के कारण नकार कर विपक्ष में बैठाया है। अब धमकियों और खोखली बयानबाजी से छत्तीसगढ़ की शांतिप्रिय जनता या हमारी निष्पक्ष पुलिस व्यवस्था डरने वाली नहीं है।

*सरकार किसी उपद्रवी को नहीं बख्शेगी*

प्रदेश सह कोषाध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसी भी उपद्रवी को नहीं बख्शेगी, चाहे वह किसी भी दल से जुड़ा हो। पुलिस बल पूरी निष्पक्षता से अपना काम कर रहा है और आगे भी करता रहेगा। पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी मर्यादा याद रखनी चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं को धमकाने से बाज आना चाहिए।


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पिथौरा में आस्था के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की बहूड़ा रथ यात्रा, दर्शन को लगी लंबी कतारें

जुलाई 24, 2026






*पिथौरा  संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर*/ पिथौरा नगर में 16 जुलाई से प्रारंभ रथ यात्रा उत्सव के बाद 9 दिन तक मौसी के घर जनक मंदिर में विराजमान रहने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा शुक्रवार को बहूड़ा रथ पर सवार होकर अपने मुख्य मंदिर वापस लौटे। बहूड़ा रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर रथ की रस्सी खींची और भगवान के दर्शन किए। रथ के दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं*। पूरे नगर में "जय जगन्नाथ" के जयकारों से भक्तिमय माहौल रहा।

विधि-विधान से हुई रथ की विदाई*

आषाढ़ माह की द्वितीया को निकली रथ यात्रा के बाद तीनों देव 9 दिनों तक अपने मौसी घर जनक मंदिर में विराजमान थे। बहूड़ा एकादशी के अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के बाद शाम 4 बजे रथ को जनक मंदिर से जगन्नाथ मंदिर के लिए रवाना किया गया। रथ खींचने की परंपरा निभाने के लिए युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी उत्साह के साथ आगे आए।

भक्तिमय माहौल, जगह-जगह हुआ स्वागत*

ढोल-मंजीरे, शंखध्वनि और भजनों के बीच रथ धीरे-धीरे नगर के मुख्य मार्गों से होकर आगे बढ़ा। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान का स्वागत किया। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पानी और प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। दूर-दराज के गांवों से आए भक्तों ने भी रथ यात्रा में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित किया। धार्मिक मान्यता है कि बहूड़ा रथ खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

प्रशासनिक व्यवस्था रही मुस्तैद*

यात्रा को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल, महिला आरक्षक और ट्रैफिक कर्मी तैनात थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी। नगर पंचायत द्वारा मार्गों की सफाई और सजावट की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही।

पुरानी बस्ती मंदिर में हुई भव्य आरती और विराजमान*


*पुरानी बस्ती स्थित जगन्नाथ मंदिर* पहुंचने पर भव्य आरती और पूजा के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को विधिवत विराजमान किया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि अब 15 दिन बाद भगवान की स्नान यात्रा की तैयारियां शुरू की जाएंगी।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह*



स्थानीय श्रद्धालुओं ने बताया कि पिथौरा की बहूड़ा यात्रा क्षेत्र की सबसे बड़ी धार्मिक परंपराओं में से एक है। हर साल इस आयोजन में शामिल होकर उन्हें आत्मिक शांति मिलती है।

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पोलैंड में सैन्य-स्तरीय मानव अपकेंद्र प्रशिक्षण पूरा कर छत्तीसगढ़ आधारित अंतरिक्ष डिजाइन शोध संस्था अर्कासा ने हासिल की बड़ी उपलब्धि*

जुलाई 24, 2026
पोलैंड में सैन्य-स्तरीय मानव अपकेंद्र प्रशिक्षण पूरा कर छत्तीसगढ़ आधारित अंतरिक्ष डिजाइन शोध संस्था अर्कासा ने हासिल की बड़ी उपलब्धि*




रायपुर संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /छत्तीसगढ़ आधारित अंतरिक्ष शोध संस्था *अर्कासा – अंतरिक्ष वास्तुकला एवं डिजाइन शोध प्रयोगशाला* ने पोलैंड में विश्वस्तरीय *मानव अपकेंद्र प्रशिक्षण* सफलतापूर्वक पूरा कर एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। यह सैन्य-स्तरीय प्रशिक्षण संस्था की संस्थापक वास्तुकार *अर्शलीन कौर साहनी*, सह-संस्थापक वास्तुकार *बिस्वजीत दास* और अर्कासा टीम द्वारा पूरा किया गया।

यह वही उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसका उपयोग एफ-16, एफ-35 और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों के चालकों के साथ-साथ उच्च-जी वातावरण के लिए अंतरिक्ष यात्रियों की तैयारी में किया जाता है।

*रायपुर की संस्था ने बढ़ाया देश-प्रदेश का नाम*

रायपुर में स्थापित *अर्कासा* एक उभरती हुई अंतरिक्ष वास्तुकला एवं डिजाइन शोध प्रयोगशाला है, जो विज्ञान, वास्तुकला, डिजाइन और मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के संगम पर कार्य कर रही है। यह संस्था भविष्य के चंद्र एवं मंगल अभियानों, मानव-केंद्रित अंतरिक्ष आवास, समरूप अंतरिक्ष यात्री मिशनों और अंतरिक्ष शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए कार्यरत है। इसका उद्देश्य वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करना है।

अर्कासा को आधिकारिक रूप से *इसरो के अंतरिक्ष शिक्षक कार्यक्रम* के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है और यह *इन-स्पेस (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र)* के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का भी हिस्सा है। संस्था का उद्देश्य भारत में *अंतरिक्ष वास्तुकला* को एक उभरते हुए क्षेत्र के रूप में स्थापित करना तथा युवाओं और शोधकर्ताओं को अंतरिक्ष विज्ञान, डिजाइन और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।

पोलैंड में हुआ प्रशिक्षण*

मानव अपकेंद्र प्रशिक्षण का आयोजन पोलैंड के *समरूप अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र* के संस्थापक श्री *माटेउज हरासिमचुक* और *सैन्य विमानन चिकित्सा संस्थान, वारसॉ* के सहयोग से किया गया।

इस प्रशिक्षण में अर्कासा की ओर से संस्थापक वास्तुकार *अर्शलीन कौर साहनी*, सह-संस्थापक वास्तुकार *बिस्वजीत दास*, अर्कासा टीम के सदस्य *लूमेश साहू*, तथा *अनुष्का राठौर* ने भाग लिया।

*क्या है मानव अपकेंद्र प्रशिक्षण*

मानव अपकेंद्र दुनिया की सबसे उन्नत अंतरिक्ष यात्री और लड़ाकू विमान चालक प्रशिक्षण प्रणालियों में से एक है, जिसमें नियंत्रित वातावरण में प्रतिभागियों को अत्यधिक *जी-बल* का अनुभव कराया जाता है। इस प्रशिक्षण के दौरान टीम ने *जी-रोधी युक्तियां, जी-जनित चेतना हानि से बचाव*, उच्च त्वरण के दौरान मानव शरीर की शारीरिक प्रतिक्रियाओं और अत्याधुनिक लड़ाकू विमान चालक कक्ष अनुकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो उच्च प्रदर्शन वाले सैन्य विमानों में अनुभव की जाने वाली परिस्थितियों को दोहराता है।

"यह भविष्य के मिशनों के लिए जरूरी" - अर्शलीन कौर*

इस उपलब्धि पर संस्थापक वास्तुकार *अर्शलीन कौर साहनी* ने कहा कि भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों की सफलता केवल अंतरिक्ष यानों और तकनीक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह समझना भी आवश्यक है कि अत्यधिक परिस्थितियों में मानव शरीर किस प्रकार कार्य करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान अर्कासा के अंतरिक्ष वास्तुकला, मानव-केंद्रित अंतरिक्ष आवास और भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान अनुसंधान को और मजबूत करेगा।

यह उपलब्धि *छत्तीसगढ़ के उभरते हुए अंतरिक्ष नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र* के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। दुनिया के सबसे विशिष्ट सैन्य-स्तरीय वायु-अंतरिक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा कर अर्कासा ने यह प्रदर्शित किया है कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले शोधकर्ता और नवप्रवर्तक वैश्विक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के भविष्य में सार्थक योगदान दे रहे हैं।


via Blogger https://www.sanskar.live/2026/07/blog-post_82.html
2026-07-24T19:09:40+05:30
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पोलैंड में सैन्य-स्तरीय मानव अपकेंद्र प्रशिक्षण पूरा कर छत्तीसगढ़ आधारित अंतरिक्ष डिजाइन शोध संस्था अर्कासा ने हासिल की बड़ी उपलब्धि*

जुलाई 24, 2026




रायपुर संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /छत्तीसगढ़ आधारित अंतरिक्ष शोध संस्था *अर्कासा – अंतरिक्ष वास्तुकला एवं डिजाइन शोध प्रयोगशाला* ने पोलैंड में विश्वस्तरीय *मानव अपकेंद्र प्रशिक्षण* सफलतापूर्वक पूरा कर एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। यह सैन्य-स्तरीय प्रशिक्षण संस्था की संस्थापक वास्तुकार *अर्शलीन कौर साहनी*, सह-संस्थापक वास्तुकार *बिस्वजीत दास* और अर्कासा टीम द्वारा पूरा किया गया।

यह वही उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसका उपयोग एफ-16, एफ-35 और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों के चालकों के साथ-साथ उच्च-जी वातावरण के लिए अंतरिक्ष यात्रियों की तैयारी में किया जाता है।

*रायपुर की संस्था ने बढ़ाया देश-प्रदेश का नाम*

रायपुर में स्थापित *अर्कासा* एक उभरती हुई अंतरिक्ष वास्तुकला एवं डिजाइन शोध प्रयोगशाला है, जो विज्ञान, वास्तुकला, डिजाइन और मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के संगम पर कार्य कर रही है। यह संस्था भविष्य के चंद्र एवं मंगल अभियानों, मानव-केंद्रित अंतरिक्ष आवास, समरूप अंतरिक्ष यात्री मिशनों और अंतरिक्ष शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए कार्यरत है। इसका उद्देश्य वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करना है।

अर्कासा को आधिकारिक रूप से *इसरो के अंतरिक्ष शिक्षक कार्यक्रम* के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है और यह *इन-स्पेस (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र)* के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का भी हिस्सा है। संस्था का उद्देश्य भारत में *अंतरिक्ष वास्तुकला* को एक उभरते हुए क्षेत्र के रूप में स्थापित करना तथा युवाओं और शोधकर्ताओं को अंतरिक्ष विज्ञान, डिजाइन और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।

पोलैंड में हुआ प्रशिक्षण*

मानव अपकेंद्र प्रशिक्षण का आयोजन पोलैंड के *समरूप अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र* के संस्थापक श्री *माटेउज हरासिमचुक* और *सैन्य विमानन चिकित्सा संस्थान, वारसॉ* के सहयोग से किया गया।

इस प्रशिक्षण में अर्कासा की ओर से संस्थापक वास्तुकार *अर्शलीन कौर साहनी*, सह-संस्थापक वास्तुकार *बिस्वजीत दास*, अर्कासा टीम के सदस्य *लूमेश साहू*, तथा *अनुष्का राठौर* ने भाग लिया।

*क्या है मानव अपकेंद्र प्रशिक्षण*

मानव अपकेंद्र दुनिया की सबसे उन्नत अंतरिक्ष यात्री और लड़ाकू विमान चालक प्रशिक्षण प्रणालियों में से एक है, जिसमें नियंत्रित वातावरण में प्रतिभागियों को अत्यधिक *जी-बल* का अनुभव कराया जाता है। इस प्रशिक्षण के दौरान टीम ने *जी-रोधी युक्तियां, जी-जनित चेतना हानि से बचाव*, उच्च त्वरण के दौरान मानव शरीर की शारीरिक प्रतिक्रियाओं और अत्याधुनिक लड़ाकू विमान चालक कक्ष अनुकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो उच्च प्रदर्शन वाले सैन्य विमानों में अनुभव की जाने वाली परिस्थितियों को दोहराता है।

"यह भविष्य के मिशनों के लिए जरूरी" - अर्शलीन कौर*

इस उपलब्धि पर संस्थापक वास्तुकार *अर्शलीन कौर साहनी* ने कहा कि भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों की सफलता केवल अंतरिक्ष यानों और तकनीक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह समझना भी आवश्यक है कि अत्यधिक परिस्थितियों में मानव शरीर किस प्रकार कार्य करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान अर्कासा के अंतरिक्ष वास्तुकला, मानव-केंद्रित अंतरिक्ष आवास और भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान अनुसंधान को और मजबूत करेगा।

यह उपलब्धि *छत्तीसगढ़ के उभरते हुए अंतरिक्ष नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र* के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। दुनिया के सबसे विशिष्ट सैन्य-स्तरीय वायु-अंतरिक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा कर अर्कासा ने यह प्रदर्शित किया है कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले शोधकर्ता और नवप्रवर्तक वैश्विक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के भविष्य में सार्थक योगदान दे रहे हैं।

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सलडीह–ढोढरकसा मार्ग बदहाल: गड्ढों में तब्दील सड़क से राहगीर परेशान, दुर्घटना का खतरा

जुलाई 24, 2026
सलडीह–ढोढरकसा मार्ग बदहाल: गड्ढों में तब्दील सड़क से राहगीर परेशान, दुर्घटना का खतरा
सलडीह–ढोढरकसा मार्ग बदहाल: गड्ढों में तब्दील सड़क से राहगीर परेशान, दुर्घटना का खतरा

 ठेका स्वीकृत होने के बाद भी शुरू नहीं हुआ निर्माण, ग्रामीणों में नाराजगी_




*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर* जिले के *सलडीह से ढोढरकसा* को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली के कारण लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सड़क पर जगह-जगह *बड़े-बड़े गड्ढे* हो गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती। ऐसे में दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल राहगीरों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

*बारिश में और खतरनाक हुआ सफर*  

बारिश के दौरान यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है। पानी से भरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है, जिससे *दुर्घटनाओं की आशंका* बढ़ गई है। कई बार बाइक सवार गड्ढों में गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन *ग्रामीण, किसान, छात्र एवं अन्य लोग* आवागमन करते हैं। सलडीह, ढोढरकसा सहित आसपास के 8-10 गांवों के लोग इसी सड़क से जिला मुख्यालय और बाजार आते-जाते हैं, लेकिन सड़क की जर्जर हालत के कारण उन्हें मजबूरी में जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है।

लंबे समय से हो रही मांग*  

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मरम्मत या *पुनर्निर्माण की मांग* की जा रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। सड़क की बिगड़ती हालत से क्षेत्रवासियों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

*ठेका स्वीकृत, काम शुरू नहीं*  

सूत्रों के अनुसार, *सलडीह–ढोढरकसा मार्ग के निर्माण कार्य के लिए ठेका भी स्वीकृत* हो चुका है। लेकिन ठेका स्वीकृत होने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों को राहत नहीं मिल सकी है। बरसात के कारण स्थिति और खराब होती जा रही है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द कार्य प्रारंभ कर इस महत्वपूर्ण मार्ग को दुरुस्त करेगा, ताकि क्षेत्रवासियों को *सुरक्षित और सुगम आवागमन* की सुविधा मिल सके।

राहगीरों की समस्याएं

1.  *गड्ढे*: जगह-जगह बड़े गड्ढे, पानी भरने से दिखते नहीं

2.  *खतरा*: दुर्घटना की आशंका, बाइक सवार गिरकर होते हैं चोटिल

3.  *प्रभावित*: किसान, छात्र, ग्रामीण और बाजार जाने वाले लोग

4.  *मांग*: तत्काल मरम्मत और निर्माण कार्य शुरू करने की मांग


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2026-07-24T13:36:24+05:30
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सलडीह–ढोढरकसा मार्ग बदहाल: गड्ढों में तब्दील सड़क से राहगीर परेशान, दुर्घटना का खतरा

जुलाई 24, 2026
सलडीह–ढोढरकसा मार्ग बदहाल: गड्ढों में तब्दील सड़क से राहगीर परेशान, दुर्घटना का खतरा

 ठेका स्वीकृत होने के बाद भी शुरू नहीं हुआ निर्माण, ग्रामीणों में नाराजगी_




*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर* जिले के *सलडीह से ढोढरकसा* को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली के कारण लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सड़क पर जगह-जगह *बड़े-बड़े गड्ढे* हो गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती। ऐसे में दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल राहगीरों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

*बारिश में और खतरनाक हुआ सफर*  

बारिश के दौरान यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है। पानी से भरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है, जिससे *दुर्घटनाओं की आशंका* बढ़ गई है। कई बार बाइक सवार गड्ढों में गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन *ग्रामीण, किसान, छात्र एवं अन्य लोग* आवागमन करते हैं। सलडीह, ढोढरकसा सहित आसपास के 8-10 गांवों के लोग इसी सड़क से जिला मुख्यालय और बाजार आते-जाते हैं, लेकिन सड़क की जर्जर हालत के कारण उन्हें मजबूरी में जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है।

लंबे समय से हो रही मांग*  

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मरम्मत या *पुनर्निर्माण की मांग* की जा रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। सड़क की बिगड़ती हालत से क्षेत्रवासियों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

*ठेका स्वीकृत, काम शुरू नहीं*  

सूत्रों के अनुसार, *सलडीह–ढोढरकसा मार्ग के निर्माण कार्य के लिए ठेका भी स्वीकृत* हो चुका है। लेकिन ठेका स्वीकृत होने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों को राहत नहीं मिल सकी है। बरसात के कारण स्थिति और खराब होती जा रही है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द कार्य प्रारंभ कर इस महत्वपूर्ण मार्ग को दुरुस्त करेगा, ताकि क्षेत्रवासियों को *सुरक्षित और सुगम आवागमन* की सुविधा मिल सके।

राहगीरों की समस्याएं

1.  *गड्ढे*: जगह-जगह बड़े गड्ढे, पानी भरने से दिखते नहीं

2.  *खतरा*: दुर्घटना की आशंका, बाइक सवार गिरकर होते हैं चोटिल

3.  *प्रभावित*: किसान, छात्र, ग्रामीण और बाजार जाने वाले लोग

4.  *मांग*: तत्काल मरम्मत और निर्माण कार्य शुरू करने की मांग


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सलडीह–ढोढरकसा मार्ग बदहाल: गड्ढों में तब्दील सड़क से राहगीर परेशान, दुर्घटना का खतरा

जुलाई 24, 2026

 ठेका स्वीकृत होने के बाद भी शुरू नहीं हुआ निर्माण, ग्रामीणों में नाराजगी_




*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर* जिले के *सलडीह से ढोढरकसा* को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली के कारण लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सड़क पर जगह-जगह *बड़े-बड़े गड्ढे* हो गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती। ऐसे में दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल राहगीरों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

*बारिश में और खतरनाक हुआ सफर*  

बारिश के दौरान यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है। पानी से भरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है, जिससे *दुर्घटनाओं की आशंका* बढ़ गई है। कई बार बाइक सवार गड्ढों में गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन *ग्रामीण, किसान, छात्र एवं अन्य लोग* आवागमन करते हैं। सलडीह, ढोढरकसा सहित आसपास के 8-10 गांवों के लोग इसी सड़क से जिला मुख्यालय और बाजार आते-जाते हैं, लेकिन सड़क की जर्जर हालत के कारण उन्हें मजबूरी में जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है।

लंबे समय से हो रही मांग*  

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मरम्मत या *पुनर्निर्माण की मांग* की जा रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। सड़क की बिगड़ती हालत से क्षेत्रवासियों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

*ठेका स्वीकृत, काम शुरू नहीं*  

सूत्रों के अनुसार, *सलडीह–ढोढरकसा मार्ग के निर्माण कार्य के लिए ठेका भी स्वीकृत* हो चुका है। लेकिन ठेका स्वीकृत होने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों को राहत नहीं मिल सकी है। बरसात के कारण स्थिति और खराब होती जा रही है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द कार्य प्रारंभ कर इस महत्वपूर्ण मार्ग को दुरुस्त करेगा, ताकि क्षेत्रवासियों को *सुरक्षित और सुगम आवागमन* की सुविधा मिल सके।

राहगीरों की समस्याएं

1.  *गड्ढे*: जगह-जगह बड़े गड्ढे, पानी भरने से दिखते नहीं

2.  *खतरा*: दुर्घटना की आशंका, बाइक सवार गिरकर होते हैं चोटिल

3.  *प्रभावित*: किसान, छात्र, ग्रामीण और बाजार जाने वाले लोग

4.  *मांग*: तत्काल मरम्मत और निर्माण कार्य शुरू करने की मांग

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