जिले के किसानों ने सीखी सुपर फूड मखाना की वैज्ञानिक खेती
जिले के किसानों ने सीखी सुपर फूड मखाना की वैज्ञानिक खेती
जिले के किसानों ने सीखी सुपर फूड मखाना की वैज्ञानिक खेती
आरंग के लिंगाडीह में भ्रमण एवं प्रशिक्षण, 80 प्रगतिशील किसानों ने लिया हिस्सा
मखाना की खेती किसानों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर - चंद्रहास चंद्राकर
कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर तथा कृषि विशेषज्ञ रविकांत साहू भी उपस्थित रहे
महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर/ धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ में अब सुपर फूड मखाना किसानों के लिए आय का नया और लाभकारी विकल्प बनकर उभर रहा है। इसी उद्देश्य से उद्यानिकी विभाग महासमुंद द्वारा विकासखंड आरंग के ग्राम लिंगाडीह में 1 जुलाई 2026 को मखाना खेती पर भ्रमण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें महासमुंद एवं पिथौरा विकासखंड के 80 प्रगतिशील किसानों ने भाग लेकर मखाना की वैज्ञानिक खेती, बीज उत्पादन एवं प्रसंस्करण की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में मखाना की व्यावसायिक खेती की शुरुआत विकासखंड आरंग के ग्राम लिंगाडीह के प्रगतिशील किसान स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर ने की थी। उन्होंने बताया कि राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र 5 दिसंबर 2021 को लिंगाडीह में स्थापित किया गया, जिससे किसानों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित हुए हैं। कार्यक्रम में आरंग जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष श्री रवीन्द्र (रिंकू) चंद्राकर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर तथा कृषि विशेषज्ञ श्री रविकांत साहू भी उपस्थित रहे।प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मखाना बीज उत्पादन केंद्र का भ्रमण किया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर ने बताया कि मखाना छह माह की अवधि वाली जलीय फसल है, जिसमें प्रति एकड़ लगभग 20 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है तथा औसतन 8 से 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप बेहद कम होता है और चोरी की संभावना भी नगण्य रहती है। उन्होंने प्रसंस्करण की जानकारी देते हुए बताया कि एक किलोग्राम मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलती है। यदि किसान स्वयं प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग कर विपणन करें तो प्रति एकड़ अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने मखाना खेती को भविष्य की लाभकारी फसल बताते हुए इसे अपनाने में उत्साह दिखाया। उद्यानिकी विभाग महासमुंद की सहायक संचालक श्रीमती पायल साव के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित उद्यानिकी अधिकारियों एवं किसानों ने मखाना की खेती को अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में श्री रविकांत साहू ने जैविक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ. अकानंद ढीमर, डॉ. योगेन्द्र चंदेल, प्रबंधक श्री संजय नामदेव तथा श्री शिव साहू सहित अन्य अधिकारी एवं किसान उपस्थित रहे।
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