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जून 12, 2022

शीर्षक: पिता की छांव विधा कविता

जून 12, 2022

 


कुमारी गुड़िया गौतम जलगांव महाराष्ट्र


संस्कार न्यूज़ जलगांव महाराष्ट्र

पिता की अद्भुत सी है एक  साया,

बच्चों को देती  शीतल सी छाया।

पिता ने  हर एक फर्ज है निभाया,

 बच्चों के लिए पसीना है बहाया।


जिसका न चुका पाये हम कर्ज,

पिता हर ज़ख्म का है एक मर्ज।

जो दुःख सहकर निभाता फर्ज,

करें जो सेवा खुशियां देती दर्ज।


पिता तो एक ईश्वर की है इबादत,

जिसमें ब्रम्ह विष्णु महेश की सूरत

न  पूजो  किसी  पत्थर की  मूरत,

इनके चरणों में ही हैं  एक जन्नत।


इनमें ही है मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा,

जिसके समाने दुःख भी हैं  हारा।

बच्चों के लिए जिसने सब है वारा,

इनकी सेवा करना फर्ज  हमारा।।



स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

कुमारी गुड़िया गौतम जलगांव महाराष्ट्र

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