स्वच्छ भारत से डिजिटल इंडिया तक, सेना के शौर्य से AI तक को चित्रों में उकेरा, 3 अक्टूबर को जिला स्तरीय प्रदर्शनी
*महासमुंद संस्कार गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट।* राष्ट्रव्यापी सेवा संकल्प अभियान के तहत द्वितीय दिवस पर जिले के 1806 शासकीय एवं निजी विद्यालयों में ‘मेरे सपनों का भारत’ थीम पर सेवा चित्र प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें 1 लाख 96 हजार विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह प्रतियोगिता केवल रंगों और रेखाओं का मेल नहीं, बल्कि बीते 25 वर्षों की विकास यात्रा और आगामी 25 वर्षों के भारत की कल्पना को कैनवास पर उतारने का रचनात्मक प्रयास रही।
प्रतियोगिता के पहले विषय ‘विगत 25 वर्ष’ में विद्यार्थियों ने स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया, सेना के शौर्य, नया कश्मीर, नक्सलवाद मुक्त भारत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एआई के बढ़ते प्रभाव सहित सामाजिक, तकनीकी और विकासात्मक बदलावों को चित्रों में स्थान दिया। कहीं स्वच्छ और सुंदर भारत की तस्वीर थी तो कहीं डिजिटल तकनीक से बदलते भारत की झलक, कहीं सीमाओं की रक्षा करते जवानों का शौर्य तो कहीं भविष्य की तकनीक की संभावनाएं।
दूसरे विषय ‘सपना-आगामी 25 वर्ष’ में बच्चों ने विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को जीवंत किया। किसी ने अंतरिक्ष और विज्ञान की नई ऊंचाइयों को छूते भारत का चित्र बनाया तो किसी ने आधुनिक गांवों, स्मार्ट शहरों, हरित ऊर्जा, आत्मनिर्भर भारत, बेहतर शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण से समृद्ध भारत की तस्वीर उकेरी। बच्चों का संदेश था कि विकास केवल इमारतों तक सीमित नहीं, बल्कि स्वच्छता, शिक्षा, तकनीक और हर नागरिक के बेहतर जीवन से राष्ट्र बनता है।
विद्यालयों में रंग, ब्रश और कागज के साथ बच्चों का उत्साह देखते ही बना। किसी के लिए भारत तिरंगे का गौरव था तो किसी के लिए तकनीक और तरक्की का, तो किसी के लिए गांव, किसान और आत्मनिर्भरता का।
यह आयोजन 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चरणबद्ध होगा। 28 सितंबर को जिले के 184 संकुलों में श्रेष्ठ चित्रों की प्रदर्शनी एवं भाषण प्रतियोगिता, 1 अक्टूबर को ब्लॉक स्तर पर और 3 अक्टूबर को जिला स्तरीय प्रदर्शनी होगी। जिला स्तर पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को सम्मानित कर राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाएगा।



