मोहगांव स्कूल टीम की मेहनत, मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास से मिली नई पहचान
महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट/ सेवा संकल्प के तहत जिले के पिथौरा विकासखण्ड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला मोहगांव ने जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा 2026 में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। विद्यालय के 10 विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा 2026 में हुआ है। यह उपलब्धि विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन तथा अभिभावकों और विद्यालय समुदाय के सहयोग का परिणाम है।जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा का महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराती है। ऐसी प्रतियोगी परीक्षा में एक साथ 10 विद्यार्थियों का चयन शासकीय प्राथमिक शाला मोहगांव के लिए गौरव का विषय है और क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
सेवा संकल्प अंतर्गत विद्यालय में पिछले तीन वर्षों में जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा में कुल 43 बच्चों का चयन हुआ है। वर्ष 2026 में 10 विद्यार्थियों का चयन इस निरंतर उपलब्धि की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह परिणाम नियमित अभ्यास, विद्यार्थियों को समय पर मार्गदर्शन तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति जागरूकता को दर्शाता है। वर्ष 2026 में चयनित 10 विद्यार्थी मेंयुवराज पटेल, कु. भावना प्रधान, कु. प्रकृति प्रधान, नितिन नायक, कु. चेतना मुटकिया, असंख्य कुमार भोई, साहिल सिंह सिदार , कु. पथिका प्रधान, कु. दीक्षा साहू एवं तुषार दास मानिकपुरी शामिल है।
शासकीय प्राथमिक शाला मोहगांव के प्रधान पाठक भोजराज प्रधान को उनके शैक्षणिक एवं उल्लेखनीय कार्यों के लिए मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण वर्ष 2017 तथा राज्यपाल पुरस्कार वर्ष 2022 से सम्मानित किया गया है। ये सम्मान उनके शैक्षणिक नेतृत्व, विद्यार्थियों के प्रति समर्पित कार्य तथा विद्यालय में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण निर्माण के प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान हैं।
प्रधान पाठक भोजराज प्रधान के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निरंतर प्रेरित किया गया। बच्चों की क्षमता को पहचानते हुए नियमित अभ्यास, प्रश्नों को समझने की क्षमता, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास विकसित करने पर ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन एवं अभ्यास के लिए प्रेरित करना। प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नों के स्वरूप से बच्चों को परिचित कराना। विद्यार्थियों की कठिनाइयों की पहचान कर अतिरिक्त समझाइश देना। अभ्यास के माध्यम से समय प्रबंधन एवं प्रश्न हल करने का आत्मविश्वास बढ़ाना। विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करना।
विद्यालय के शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर नियमित ध्यान दिया गया तथा अभ्यास और मार्गदर्शन के माध्यम से उनकी तैयारी को मजबूत किया गया। विद्यार्थियों को केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित न रखते हुए अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की आदत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। विद्यार्थियों की सफलता में विद्यालय के साथ-साथ परिवार और समुदाय की सहभागिता भी महत्वपूर्ण रही। अध्ययन के लिए सकारात्मक वातावरण, नियमित उपस्थिति और परीक्षा की तैयारी के लिए प्रोत्साहन ने बच्चों की तैयारी को मजबूत किया। बच्चों को कई संगठनों से मिले इस सम्मान से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा तथा अन्य विद्यार्थियों को भी मेहनत, नियमित अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरणा मिली। विद्यालय की उपलब्धि को समुदाय द्वारा मिला यह प्रोत्साहन शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण को और मजबूत करता है।

