सरकारी स्कूल की तस्वीर बदलने वाले टीचर की कहानी: जहां फेंकी हुई चीजें बन जाती हैं विज्ञान का मॉडल
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*बागबाहरा संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट*/जब शिक्षा को मिशन बना लिया जाए तो संसाधन मायने नहीं रखते, इसे साबित कर दिखाया है बागबाहरा ब्लॉक के छोटे से गांव बिंद्रावन के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के शिक्षक *रामप्रसाद साहू* ने। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा शिक्षक दिवस (5 सितंबर 2026) पर घोषित *राज्य शिक्षक पुरस्कार 2026-27* के लिए उनका चयन हुआ है।
महासमुंद जिले के लिए यह गौरव का क्षण है। चयन की खबर मिलते ही बिंद्रावन स्कूल से लेकर BEO कार्यालय तक बधाइयों का तांता लग गया।
कौन हैं रामप्रसाद साहू ? - जीरो बजट में हीरो टीचर*
रामप्रसाद साहू किताबी पढ़ाई में यकीन नहीं रखते। उनका मंत्र है - *"करके सीखो"*
- *कबाड़ से जुगाड़:* उनके लिए कचरा कचरा नहीं है। टूटी चप्पल, खाली बोतल, पुराने टायर, नारियल की खोल से वे ऐसा TLM (सहायक शिक्षण सामग्री) बना देते हैं कि बच्चे खेल-खेल में विज्ञान और गणित के कठिन सूत्र सीख जाते हैं।
- *शून्य निवेश नवाचार:* बिना एक रुपया खर्च किए उन्होंने स्कूल की पूरी पढ़ाई का तरीका बदल दिया। बच्चे अब ब्लैकबोर्ड नहीं, एक्टिविटी से पढ़ते हैं।
- *हैट्रिक:* लगातार 3 साल तक उनके मार्गदर्शन में बच्चों का चयन *प्रयास आवासीय विद्यालय* के लिए हुआ है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "रामप्रसाद जी उन शिक्षकों में हैं जो प्राइवेट स्कूलों को भी फेल कर रहे हैं। सरकारी स्कूल में ऐसा रिजल्ट प्राइवेट के लिए चुनौती है।"
*दूसरी बार मिला राज्य स्तरीय सम्मान*
यह पहला मौका नहीं है। साल 2020 में उन्हें राज्य का सबसे बड़ा शिक्षा सम्मान *मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण ज्ञानदीप पुरस्कार* भी मिल चुका है। दो बार राज्य स्तरीय पुरस्कार पाना बागबाहरा ब्लॉक में पहली बार हुआ है।
*शिक्षा जगत में खुशी की लहर*
विकासखंड शिक्षा अधिकारी बी.एल. दीवान ने कहा - "रामप्रसाद साहू का चयन पूरे बागबाहरा ब्लॉक का सम्मान है। उन्होंने साबित किया है कि सरकारी शिक्षक चाहे तो क्या नहीं कर सकता।"
संकुल समन्वयक खगेश्वर साहनी, प्रधान पाठक गोविन्द सिंह चक्रधारी, वैशाली ब्यौहार, डॉ. विजय शर्मा, रिंकल बग्गा, सुबोध तिवारी सहित पूरे शिक्षक परिवार ने उन्हें बधाई दी है।
