महासमुन्द के शासकीय आदर्श आशीबाई गोलछा स्कूल में निबंध प्रतियोगिता, जागरूकता रैली और संकल्प कार्यक्रम का आयोजन, विशेषज्ञों ने बताए प्लास्टिक से होने वाले नुकसान
महासमुन्द संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /धरती पर जीवन तभी संभव है जब प्रकृति संतुलित रहे। वायु, जल, मिट्टी और हरियाली के बिना मानव सभ्यता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसी भावना को लेकर सोमवार को आस्था वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसाइटी द्वारा शासकीय आदर्श आशीबाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महासमुन्द में विश्व प्रकृति दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय परिसर में पौधारोपण के साथ हुआ। इसके पश्चात "प्रकृति संरक्षण और हमारा दायित्व" विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों ने अपने निबंधों में जलवायु परिवर्तन, वनों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ते प्रदूषण और प्लास्टिक कचरे से हो रहे नुकसान का उल्लेख किया। कई विद्यार्थियों ने अपने लेख में सुझाव भी दिए कि किस प्रकार छोटे-छोटे प्रयासों से हम प्रकृति को बचा सकते हैं।
निबंध प्रतियोगिता के बाद आयोजित जागरूकता सत्र में आस्था वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसाइटी के सदस्यों ने बच्चों को पर्यावरण के वर्तमान संकट के बारे में विस्तार से बताया। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। यह न केवल नालियों को जाम कर रहे हैं बल्कि मिट्टी में सैकड़ों सालों तक नष्ट नहीं होते। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है और पशु-पक्षी भी इसे खाकर बीमार पड़ रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बच्चों को बताया कि प्रकृति हमें निःशुल्क ऑक्सीजन, पानी और भोजन देती है, लेकिन बदले में हम उसे कचरे और प्रदूषण दे रहे हैं। यदि समय रहते हमने प्रकृति को नहीं बचाया तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब पूरे विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और सोसाइटी के सदस्यों ने मिलकर "पॉलीथिन मुक्ति" की शपथ ली। सभी ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग नहीं करेंगे, बल्कि कपड़े और जूट के थैले अपनाएंगे। साथ ही अपने घर-परिवार और मोहल्ले में भी लोगों को इस अभियान से जोड़ेंगे।
इस अवसर पर सोसाइटी की ओर से शोभा शर्मा ने कहा कि बच्चों में बचपन से ही पर्यावरण के प्रति संवेदना विकसित करना जरूरी है। विनोद रंगारी ने कहा कि प्रकृति दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। तुषार चंद्राकर, लता वैष्णव, आबिद खान और तृप्ति साहू ने भी बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के टिप्स दिए।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य ने आस्था सोसाइटी के प्रयासों की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजन से बच्चों में सकारात्मक बदलाव आएगा। अंत में सभी ने "हरा-भरा महासमुन्द, स्वच्छ महासमुन्द" बनाने का संकल्प लिया।
इस आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई
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