मानव जीवन श्रेष्ठ है, इसे प्रभु के चरणों में सौंपे : शेषाचार्य जी महाराज सरायपाली
सरायपाली संस्कार न्यूज़/ मेढापाली के भक्तो के द्वारा आयोजित पूज्य श्री शेषाचार्य जी महाराज के सानिध्य में 24फरवरी से 2 मार्च से 2022 तक प्रतिदिन दोपहर 1:00 बजे से 5:00 बजे तक स्थान मेढापाली पोस्ट बिछिया जिला महासमुंद छत्तीसगढ़ श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस पर महाराज श्री ने भागवत कथा के महात्यम का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।कथा के प्रथम दिन भक्तों ने भाव पूर्ण रूप महाराज जी के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया।पूज्य श्री शेषाचार्य जी महाराज ने कथा पंडाल में बैठे सभी भक्तों को भजन "अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम "श्रवण कराया”।
कथा की शुरुआत में महाराज श्री ने भागवत के प्रथम श्लोक उच्चारण “सच्चिदानन्द रूपाय विश्वोत्पत्यादि हेतवे तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयम नुमः”के उच्चारण के साथ की। उन्होंने श्लोक का अर्थ समझाते हुए कहा की जगत गुरु सर्वेश्वर श्रीकृष्ण को हम बार - बार नमन करते है उनको प्रणाम करते है ऐसे सतघन,चितघन,आनंदघन ऐसे भगवान सच्चिदानन्द स्वरूप को कोटि - कोटि नमन करते है जो अपने चाहने वालों के त्रितापों को एक क्षण में नष्ट कर देते है। दैहिक दैविक भौतिक इन्द्र तापो को उनकी शरण में आने वाले ये तीनो ताप उनको नहीं सता सकते एक क्षड़ में ही इन तीनो तापों का वो नाश कर देते है। ऐसे उन परम प्रभु परमात्मा सर्वेश्वर सच्चिदानन्द के चरणों में हम कोटि - कोटि नमन करते है।पूज्य श्री शेषाचार्य जी महाराज ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि एक बार सनकादिक ऋषि और सूत जी महाराज विराजमान थे तो उन्होंने ये प्रश्न किया की कलयुग के लोगों का कल्याण कैसे होगा ? आप देखिये किसी भी पुराण में किसी और युग के लोगो की चिंता नहीं की पर कलयुग के लोगों के कल्याण की चिंता हर पुराण और वेद में की गई कारण क्या है ? क्योकि कलयुग का प्राणी अपने कल्याण के मार्ग को भूल कर केवल अपने मन की ही करता है जो उसके मन को भाये वह बस वही कार्य करता है और फिर कलयुग के मानव की आयु कम है और शास्त्र ज्यादा है तो फिर एक कल्याण का मार्ग बताया भागवत कथा। श्रीमद भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीव का कल्याण हो जाता है महाराज श्री ने कहा कि व्यास जी ने जब इस भगवत प्राप्ति का ग्रंथ लिखा, तब भागवत नाम दिया गया। बाद में इसे श्रीमद् भागवत नाम दिया गया। इस श्रीमद् शब्द के पीछे एक बड़ा मर्म छुपा हुआ है श्री यानी जब धन का अहंकार हो जाए तो भागवत सुन लो, अहंकार दूर हो जाएगा।व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो। केवल सुनो ही नहीं बल्कि भागवत की मानों भी। सच्चा हिन्दू वही है जो कृष्ण की सुने और उसको माने , गीता की सुनो और उसकी मानों भी , माँ - बाप, गुरु की सुनो तो उनकी मानो भी तो आपके कर्म श्रेष्ठ होंगे और जब कर्म श्रेष्ठ होंगे तो आप को संसार की कोई भी वस्तु कभी दुखी नहीं कर पायेगी। और जब आप को संसार की किसी बात का फर्क पड़ना बंद हो जायेगा तो निश्चित ही आप वैराग्य की और अग्रसर हो जायेगे और तब ईश्वर को पाना सरल हो जायेगा।
श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कपिल देवहूती संवाद, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र का वृतांत सुनाया जाएगा।
राधे राधे