किसानों के मित्र नंदी की पूजा है पोरा, यही छत्तीसगढ़ की असली पहचान है" : विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने सपत्नीक की पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों को दी बधाई* - sanskar.live

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सितंबर 10, 2026

किसानों के मित्र नंदी की पूजा है पोरा, यही छत्तीसगढ़ की असली पहचान है" : विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने सपत्नीक की पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों को दी बधाई*

किसानों के मित्र नंदी की पूजा है पोरा, यही छत्तीसगढ़ की असली पहचान है" : विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने सपत्नीक की पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों को दी बधाई*
किसानों के मित्र नंदी की पूजा है पोरा, यही छत्तीसगढ़ की असली पहचान है" : विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने सपत्नीक की पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों को दी बधाई*

 



*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट।* छत्तीसगढ़ की माटी, कृषि और किसान संस्कृति के प्रतीक पोरा तिहार को गुरुवार को पूरे प्रदेश में बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महासमुंद में भी परंपरा और आस्था का संगम देखने को मिला। क्षेत्रीय विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने अपने कार्यालय में सपत्नीक पूरे विधि-विधान से नंदी (बैल) की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों को पोरा तिहार की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

*बाजार में की खरीदारी, कार्यकर्ताओं ने दी बधाई*

पूजा-अर्चना से पूर्व विधायक श्री सिन्हा ने स्थानीय बाजार पहुंचकर पोरा तिहार के लिए मिट्टी के बैल, सजावट सामग्री और पूजन सामग्री की खरीदारी भी की। कार्यालय में पूजा के दौरान भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर उन्हें पर्व की शुभकामनाएं दी। पूरे कार्यालय परिसर में पर्व की रौनक देखने को मिली।

विधायक ने कहा - पोरा तिहार कृषि संस्कृति का महापर्व है*

इस अवसर पर विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि पोरा तिहार सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारे छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और कृषि प्रधान पहचान का प्रतीक है। इस दिन कृषि कार्य में सहयोगी बैलों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि भाद्रपद अमावस्या के दिन धान की फसल गर्भ धारण करती है, इसलिए किसान फसल की अच्छी पैदावार और सुख-समृद्धि के लिए बैलों का पूजन कर यह पर्व मनाते हैं।

उन्होंने बताया कि गांव-गांव में किसान सुबह से ही अपने बैलों को नहला-धुलाकर, सींगों को रंगकर, गले में घंटी और माला पहनाकर सजाते हैं। इसके बाद घरों में विधि-विधान से पूजा कर उन्हें छत्तीसगढ़ी व्यंजन ठेठरी, खुरमी, अनरसा, चीला खिलाए जाते हैं। कई स्थानों पर बैल दौड़ का आयोजन भी होता है। शहरों में लोग मिट्टी के बैलों की पूजा कर अपनी परंपरा का निर्वहन करते हैं। तीज-त्योहार ही हमारी संस्कृति को सुदृढ़ करते हैं और हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखते हैं।

*भाजपा नेताओं की रही गरिमामय उपस्थिति*

इस अवसर पर नगर पालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी, भाजपा के वरिष्ठ नेता मुन्ना साहू, हरवंश सिंह (नानू भाई), संदीप घोष, राधेश्याम साहू, पार्वती साहू, पीयूष साहू, सुरेश कुमार साहू, दिनेश रूपरेला, गुड्डा सिन्हा सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।


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2026-09-10T17:26:49+05:30
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