*पिथौरा संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट।* पिथौरा नगर के गायत्री मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर बुधवार को हलषष्ठी पर्व जिसे कमरछठ भी कहा जाता है, बड़े ही धूमधाम और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया।
इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में माताओं ने अपने संतान की दीर्घायु, कुशलता और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखा। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि नवविवाहित महिलाएं भी संतान प्राप्ति की कामना को लेकर यह व्रत रखती हैं।
*सगरी पूजा रही आकर्षण का केंद्र -*
इस पर्व की पूजा पद्धति बेहद रोचक और पारंपरिक है। महिलाओं ने घरों व सामूहिक स्थलों के आंगन में दो गड्ढे खोदे, जिसे स्थानीय बोली में सगरी कहा जाता है। अपने-अपने घरों से मिट्टी से बने खिलौने, बैल, शिवलिंग, गौरी-गणेश की प्रतिमाएं बनाकर लायीं और सगरी के किनारे स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की।
पूजा के दौरान सगरी में बेलपत्र, भैंस का दूध, दही, घी, मौसमी फूल, कांसी के फूल, श्रृंगार सामग्री, लाई और महुए के फूल अर्पित किए गए। इसके पश्चात महिलाओं ने एकाग्रचित होकर हलषष्ठी माता की 6 पौराणिक कथाओं का श्रवण किया और आरती कर पूजा का समापन किया।
भैंस के दूध का है विशेष महत्व -*
इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि इस दिन गाय के दूध, दही, घी का सेवन वर्जित माना जाता है। महिलाएं भैंस के दूध, दही और पसहर चावल का ही सेवन कर व्रत को पूर्ण करती हैं।
पूजन के उपरांत माताओं ने अपने बच्चों को तिलक लगाकर उनके कंधे के पास चंदन से पुताई कर सुखी जीवन का आशीर्वाद दिया। गायत्री मंदिर सहित नगर के विभिन्न मोहल्लों में महिलाओं की भारी उपस्थिति रही।







