निर्मल बचपन के दर्पण में झलका अनुभवों का बरगद रामदर्शन पब्लिक स्कूल जंघोरा में भावुक कर देने वाले ग्रैंडपेरेंट्स डे सेलिब्रेशन में बच्चों ने धरा दादा-दादी का रूप तो छलकी बुजुर्गों की आँखें - sanskar.live

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सितंबर 13, 2026

निर्मल बचपन के दर्पण में झलका अनुभवों का बरगद रामदर्शन पब्लिक स्कूल जंघोरा में भावुक कर देने वाले ग्रैंडपेरेंट्स डे सेलिब्रेशन में बच्चों ने धरा दादा-दादी का रूप तो छलकी बुजुर्गों की आँखें




पिथौरा संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट। समय की गति भले ही अदम्य हो किंतु कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो कालचक्र की सीमाओं को लांघकर अमर हो जाते हैं ऐसा ही एक अविस्मरणीय और हृदयस्पर्शी दृश्य शनिवार को देखने को मिला जब पिथौरा के जंघोरा स्थित रामदर्शन पब्लिक स्कूल के प्रांगण में ग्रैंडपेरेंट्स डे सेलिब्रेशन का आयोजन अत्यंत गरिमामय और भावात्मक वातावरण में संपन्न हुआ यह आयोजन मात्र एक औपचारिक विद्यालयी गतिविधि नहीं था बल्कि यह पीढ़ियों के उस अटूट सेतु का उत्सव था जो आधुनिकता की अंधी दौड़ में अक्सर ओझल होने लगता है कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और विलक्षण पहलू तब सामने आया जब विद्यालय के नन्हें-मुन्ने विद्यार्थियों ने स्वयं अपने दादा-दादी और नाना-नानी का सजीव रूप धारण कर मंच पर कदम रखा आँखों पर टिका विंटेज चश्मा माथे पर पके बालों की सफेदी का भोला अभिनय कंधों पर ढलका सूती गमछा और पारंपरिक साड़ियों के पल्लू में लिपटी बाल-सुलभ चंचलता ने वहाँ मौजूद हर एक दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया जीवन के दो सर्वथा विपरीत छोर एक ओर भोर की पहली किरण सा खिलखिलाता बचपन और दूसरी ओर गोधूलि बेला सा शांत समृद्ध और अनुभवी जीवन जब इस आयोजन में एक-दूसरे के आमने-सामने आए तो पूरा प्रांगण आत्मीयता के एक अनूठे रस में भीग गया नन्हें बच्चों को अपने ही परिधानों और हाव-भाव की नकल करते देख वयोवृद्ध दादा-दादियों और नाना-नानियों की आँखों में जहाँ एक ओर अतीत की सुनहरी यादों की नमी तैर आई वहीं दूसरी ओर उनके चेहरे पर एक अलौकिक निश्चल मुस्कान खिल उठी कार्यक्रम के दौरान आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक खेलों में जब इन वरिष्ठ नागरिकों ने अपने पोते-पोतियों का हाथ थामकर हिस्सा लिया तो उम्र का सारा बोझ जैसे हवा में तिनके की तरह उड़ गया जीवन के इस उत्तरार्ध में जहाँ अक्सर एकाकीपन और उपेक्षा का मौन छाने लगता है वहाँ अपने अंश के साथ बिताए इन पलों ने उनके हृदयों में नव-जीवन का संचार कर दिया सभागृह में उपस्थित हर अभिभावक और शिक्षक उस वक्त भावविभोर हो उठा जब पोते-पोतियों ने माइक पर अपनी तोतली और निश्छल बोली में अपने बुज़ुर्गों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की यह दृश्य इस बात का जीवंत प्रमाण था कि संस्कार किसी पाठ्यपुस्तक की विषय-वस्तु नहीं बल्कि घर के बुजुर्गों की छाँव में पनपने वाली वो वटवृक्ष की जड़े हैं जो भावी पीढ़ी को जीवन के हर तूफ़ान में अडिग रहना सिखाती हैं अंत में सभी ग्रैंडपेरेंट्स का तिलक लगाकर पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया।

विद्यालय की डायरेक्टर श्रीमती कविता अग्रवाल ने कहा हमारा उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं बल्कि उन्हें हमारी जड़ों से जोड़ना है आज के एकल परिवार के दौर में बच्चे अक्सर दादा-दादी के सानिध्य से वंचित रह जाते हैं यह आयोजन बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान प्रेम और कृतज्ञता का भाव जगाने का एक छोटा सा प्रयास है हमारे बुजुर्ग हमारे अतीत का गौरव ही नहीं बल्कि हमारे वर्तमान की सबसे सुरक्षित और स्नेहमयी धरोहर हैं।

प्राचार्य श्री जोगेन्द्र मेहर ने कहा ग्रैंडपेरेंट्स डे केवल एक दिन का उत्सव नहीं बल्कि एक संस्कार है जब बच्चा अपने दादा-दादी के संघर्ष अनुभव और कहानियों को सुनता है तो उसके व्यक्तित्व का निर्माण होता है आज बच्चों ने जिस तरह अपने बुजुर्गों का रूप धारण कर उनके त्याग को मंच पर जीवंत किया वह वाकई दिल को छू लेने वाला था हम आगे भी ऐसे आयोजन करते रहेंगे ताकि नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी से जुड़ी रहे