सावन महोत्सव: थानेश्वर मंदिर पिथौरा में गूंजे तुलसी के मानस जिलेभर के मानस प्रेमी जुटे, हर माह होगी संगोष्ठी की घोषणा - sanskar.live

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अगस्त 17, 2026

सावन महोत्सव: थानेश्वर मंदिर पिथौरा में गूंजे तुलसी के मानस जिलेभर के मानस प्रेमी जुटे, हर माह होगी संगोष्ठी की घोषणा




*पिथौरा संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट /सावन महोत्सव के अंतर्गत धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में श्री थानेश्वर महादेव मंदिर पिथौरा में 16 अगस्त दिन रविवार को रामचरितमानस पर जिला स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिला मानस संगठन द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में तुलसीकृत रामचरितमानस के बालकाण्ड के प्रथम दोहे पर विस्तार से चर्चा हुई।

*गुरु की वंदना से हुई संगोष्ठी की शुरुआत*  

कार्यक्रम का शुभारंभ मानस प्रवचनकार दिनेश दीक्षित ने किया। उन्होंने बालकाण्ड के प्रथम दोहे की व्याख्या करते हुए कहा कि इसमें गोस्वामी तुलसीदास ने गुरु की वंदना की है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा "जिस तरह शरीर के सुचारु संचालन के लिए वात, कफ, पित्त का संतुलन जरूरी है, उसी तरह आध्यात्मिक जीवन में विकारों का संतुलन जरूरी है। गुरु के चरण कमलों के पराग में सरसता होती है जो जीवन को दिशा देती है।"

*आचार्यों ने बताई गुरु की महत्ता और मानस की प्रासंगिकता*  

बागबाहरा के प्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित दयालु महाराज ने कहा कि मति में शुद्धि लाने वाला ही सदगुरु होता है। "गुरुकृपा से ही तुलसीदास रामचरितमानस जैसे ग्रंथ के रचयिता बने। उन्होंने इसे 'स्वान्तः सुखाय' लिखा, लेकिन यह रचना आज समग्र विश्व के कल्याण का माध्यम बन गई है।"

सावित्रीपुर के भागवताचार्य पंडित देवराज मिश्रा ने गुरु कृपा के चार प्रकार - दृश्यकृपा, स्मरणकृपा, शब्द कृपा और स्पर्शकृपा को सोदाहरण समझाया। उन्होंने कहा "तुलसी ने रामचरितमानस की रचना समाधिस्थ भाषा में की है। यह प्रासादिक ग्रंथ है। इसे देखने, रखने और स्पर्श करने मात्र से पुण्य की प्राप्ति होती है।"

तेंदुकोना के भागवताचार्य पंडित भागीरथी दुबे ने विषय की आध्यात्मिकता और प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए संगोष्ठी के विचारणीय बिंदुओं पर ध्यान आकृष्ट किया।

*हर माह होगी संगोष्ठी, जिलेभर से जुटे मानस प्रेमी*  

जिला मानस संगठन के जिला अध्यक्ष परमेश्वर डडसेना ने स्वागत भाषण में कहा कि रामायण प्रेमियों से मिले प्रतिसाद से संगठन उत्साहित है। उन्होंने घोषणा की कि अब इस तरह की संगोष्ठी प्रतिमाह आयोजित की जाएगी।

इस अवसर पर पंडित कृष्णकुमार शर्मा, अनूप दीक्षित, मनोहर साहू, सतीश शर्मा, श्यामलाल पटेल, चंद्रशेखर नायडू, मनीराम नायक, जयकुमार पैंकरा सहित महासमुंद, बागबाहरा, बसना और सरायपाली से आए रामायण मंडलियों के सदस्य और प्रवचनकार बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन उमेश दीक्षित ने किया।

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