प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुवे बोले - ये फैसला वनवासियों, ग्रामीणों और फ्रंट लाइन स्टाफ के हितों पर कुठाराघात
*रायपुर संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट।* छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष _श्री अजीत दुवे_ ने वन विभाग के कार्यों में ठेका पद्धति लागू करने के हालिया प्रयासों और फ्रंट लाइन स्टाफ की पदस्थापना हेतु बनाई जा रही नई विभागीय स्थानांतरण नीति पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
श्री दुवे ने इसे सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी, वनवासियों, ग्रामीणों और विभाग के वर्दीधारी कर्मचारियों के आर्थिक व सेवा हितों पर हमला बताया।
*ठेका पद्धति से बेरोजगारी और पलायन का खतरा*
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक वन प्रधान राज्य है। यहाँ लाखों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की आजीविका वृक्षारोपण, नर्सरी प्रबंधन, कूप कटाई, वन सुरक्षा और जल संरक्षण जैसे स्थानीय कार्यों पर निर्भर है।
श्री दुवे ने आरोप लगाया कि यदि ठेका पद्धति लागू हुई तो बाहरी ठेकेदार मशीनों और बाहरी मजदूरों का उपयोग करेंगे। इससे स्थानीय वनवासियों को काम मिलना बंद हो जाएगा। रोजगार न मिलने से भुखमरी और बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति बनेगी। साथ ही जंगल व्यावसायिक लाभ का जरिया बनेंगे, जिससे अवैध कटाई और वन्यजीवों की सुरक्षा को खतरा होगा।
*नई स्थानांतरण नीति का भी विरोध*
संघ ने फ्रंट लाइन स्टाफ की पदस्थापना/स्थानांतरण हेतु प्रस्तावित नई नीति का भी विरोध किया। श्री दुवे ने कहा कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने स्वयं पत्र क्रमांक/3371/910/2019/10-1/1 दिनांक 18.10.2019 से ऐसी विसंगतिपूर्ण नीति का विरोध किया था। इसके बावजूद शासन के पूर्व निर्देशों को ताक पर रखकर कर्मचारियों पर यह नीति थोपी जा रही है, जिससे उनमें भारी असंतोष है।
कार्य बहिष्कार की चेतावनी*
छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के इन "ग्रामीण-विरोधी, वन-विरोधी और कर्मचारी-विरोधी" फैसलों का पुरजोर विरोध किया है।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि ठेका पद्धति तुरंत वापस नहीं ली गई, स्थानांतरण नीति पर रोक नहीं लगी और वनवासियों व कर्मचारियों के रोजगार सुरक्षित नहीं किए गए, तो पूरे प्रदेश में कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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