बसना संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर/आज के इस भौतिकवादी युग में, जहाँ इंसान आधुनिकता की अंधी दौड़ में प्रकृति को नुकसान पहुँचाने से बाज नहीं आ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो समाज को एक नई दिशा दे रही है। बसना ब्लॉक से महज 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम बड़ेडाभा के रहने वाले पूरन निषाद ने अपनी जिंदगी का एक ही मकसद बना लिया है—पर्यावरण का संरक्षण।
पूरन निषाद ने भले ही केवल प्राथमिक शाला (प्राइमरी स्कूल) तक की पढ़ाई की है, लेकिन उनकी सोच और उनके काम बड़ी-बड़ी डिग्रियां रखने वालों के लिए एक मिसाल हैं। उन्होंने अपनी बाकी की जिंदगी पेड़ों को समर्पित कर दी है और आज उनके इस छोटे से प्रयास ने एक बड़ा आकार ले लिया है।
पूरन निषाद की मेहनत का ही नतीजा है कि आज बड़ेडाभा और उसके आसपास लगभग 1,000 पेड़ बड़े हो चुके हैं। इनमें से कई फलदार वृक्ष अब फल भी देने लगे हैं। पूरन का यह प्रयास सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उन पारंपरिक और औषधीय पेड़ों को बचाने की मुहिम में जुटे हैं जो धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हैं।
*वे विशेष रूप से इन वृक्षों को सहेज रहे हैं*
पारंपरिक व छायादार वृक्ष- पीपल, बरगद, फलदार व विलुप्तप्राय वृक्ष- आम, अमरूद, आंवला, जामुन और गशती
पूरन निषाद का यह अभियान सरकार और वन विभाग की नीतियों पर भी एक बड़ा वैचारिक सवाल खड़ा करता है। उनका मानना है कि आज सरकारें सड़कों के किनारे सिर्फ विदेशी प्रजाति के पेड़ों (जैसे गुलमोहर, यूकेलिप्टस आदि) को बढ़ावा दे रही हैं, जो सिर्फ दिखावे और छाया के काम आते हैं।
पूरन निषाद सरकार को याद दिलाते हैं कि सड़कों के किनारे विदेशी पेड़ों की जगह फलदार और स्वदेशी वृक्ष लगाए जाने चाहिए। इसके पीछे उनका एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक तर्क है कि
फलदार वृक्ष न केवल इंसानों को फल देते हैं, बल्कि जैव विविधता (Biodiversity) को भी बनाए रखते हैं। इन पेड़ों पर अनगिनत छोटे जीव-जंतु, पक्षी और कीट-पतंगे अपना जीवन बसर करते हैं, जिससे हमारा पूरा ईकोसिस्टम सुरक्षित रहता है।
इतने बड़े स्तर पर नि:स्वार्थ भाव से काम करने के बावजूद पूरन निषाद को प्रशासन या समाज से वह प्रोत्साहन और मदद नहीं मिल पा रही है, जिसकी वे उम्मीद रखते हैं। सरकारी विभागों की बेरुखी के बाद भी उनके हौसले डगमगाए नहीं हैं।
पूरन निषाद का यह कदम आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और मौसम चक्र में आ रहे बदलावों से जूझ रही है, ऐसे में बड़ेडाभा के इस ग्रीन हीरो का प्रयास भले ही छोटा लगे, लेकिन पर्यावरण को बचाने और धरती को हरा-भरा रखने का उनका यह संकल्प वाकई वंदनीय है।




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