महासमुंद में शुरू हुआ "सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान: आंगनबाड़ी बहनों से लेकर छात्राओं तक ने संभाला मोर्चा
*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने पूरे प्रदेश में *"ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान-2026* की शुरुआत की है। महिला एवं बाल विकास विभाग एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य सीमा पर ड्यूटी कर रहे सैनिकों का मनोबल बढ़ाना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।
क्या है "ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र" अभियान*
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास *श्री टिक्वेंद्र जटवार* ने बताया कि यह अभियान पूर्व सैनिक महासभा के सहयोग से संचालित एक गैर-राजनीतिक और राष्ट्रव्यापी देशभक्ति अभियान है। अभियान के तहत पूरे छत्तीसगढ़ से सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए 3 चीजें एकत्रित की जाएंगी:
1. *स्वनिर्मित मौली धागा और राखी* - रक्षाबंधन के प्रतीक के रूप में
2. *सैनिक भाई के नाम शुभकामना पत्र* - जिसमें प्रेषक का नाम, पता और मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा
3. *छत्तीसगढ़ की पावन मिट्टी* - विजय तिलक के लिए एक चुटकी मिट्टी
संग्रहित की गई यह सामग्री पूर्व सैनिकों की टीम द्वारा एकत्र कर *भारतीय सेना मुख्यालय, नई दिल्ली* तक पहुंचाई जाएगी। वहां से इसे देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक भिजवाया जाएगा।
*महासमुंद में व्यापक स्तर पर तैयारी*
महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद ने अभियान को सफल बनाने के लिए जिले भर में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने जिले की *आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, स्कूल-कॉलेज की छात्राओं, धार्मिक संगठनों और समस्त महासमुंदवासियों* से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में "सिपाही रक्षा सूत्र" तैयार करें।
श्री जटवार ने कहा कि प्रत्येक महतारी वंदन योजना की हितग्राही और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान की अग्रदूत बनें। घर-घर जाकर महिलाओं और बच्चों को इस अभियान से जोड़ें, ताकि हर घर से एक रक्षा सूत्र सीमा तक पहुंचे।
*इस तरह तैयार करें रक्षा-सूत्र का लिफाफा*
विभाग द्वारा लिफाफा तैयार करने की प्रक्रिया भी बताई गई है। एक छोटे लिफाफे में स्वनिर्मित राखी और मौली धागा रखें। साथ में सैनिक के नाम एक शुभकामना पत्र जोड़ें और उसमें अपना पूरा नाम, पता व मोबाइल नंबर अवश्य लिखें। अंत में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की एक चुटकी पैकेट में रखकर उसे बंद कर दें। यह पैकेट ही "सिपाही रक्षा सूत्र" कहलाएगा।
30 जुलाई अंतिम तिथि, इन केंद्रों पर करें जमा*
तैयार किए गए सभी रक्षा-सूत्र के लिफाफे *30 जुलाई 2026 तक* जमा किए जा सकते हैं। नागरिक अपने नजदीकी *आंगनबाड़ी केंद्र, एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय* या *जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, महासमुंद* के कार्यालय में लिफाफे जमा कर सकते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह छोटा सा प्रयास देश के प्रहरियों के हौसले को कई गुना बढ़ाएगा और आमजन व सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करेगा।


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