सत्ता की अकुलाहट में आपा खो बैठे भूपेश - अलका चंद्राकर ने साधा निशाना
*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर*/इस्पात मंत्रालय भारत सरकार की स्वतंत्र निदेशक और भारतीय जनता पार्टी पंचायत प्रकोष्ठ की प्रदेश सह कोषाध्यक्ष अलका चंद्राकर ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सोशल मीडिया पर पुलिस अधिकारियों और भाजपा नेताओं के खिलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर होने के बाद बघेल अपनी भाषायी मर्यादा और मानसिक संतुलन खो चुके हैं।
"फिर मिलेंगे" जैसी धमकी, अराजकता का प्रतीक*
अलका चंद्राकर ने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री का यह कहना कि _'पुलिस अधिकारी ध्यान रखें, भाजपा कुछ ही महीनों की मेहमान है... फिर मिलेंगे'_ यह कोई लोकतांत्रिक भाषा नहीं है। यह कानून के रक्षकों को खुलेआम डराने और धौंस जमाने की नाकाम कोशिश है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब कोई 'सिण्डिकेट' या 'कमिश्नर' राज नहीं चल रहा, बल्कि कानून और सुशासन का राज है।
*निष्पक्ष पुलिस पर अनर्गल आरोप*
भाजपा नेत्री ने कहा कि अपनी विफलता और कार्यकर्ताओं की अराजकता को छिपाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बघेल राज्य के निष्पक्ष पुलिस प्रशासन पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। दिन-रात जनता की सुरक्षा में तैनात वर्दीधारियों को धमकी देना बघेल की अलोकतांत्रिक सोच और भाषायी दरिद्रता को उजागर करता है। कांग्रेस के शासनकाल में जिस प्रकार कानून-व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ाई गईं, उस मानसिकता से कांग्रेस आज भी बाहर नहीं निकल पाई है।
*जनता ने नकारा, अब संस्थाओं पर बौखलाहट*
अलका चंद्राकर ने कहा कि जब भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा अराजकता फैलाए जाने पर पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करती है, तो भूपेश बघेल कानून के रक्षकों को ही कठघरे में खड़ा करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें उनके कारनामों और भ्रष्टाचार के कारण नकार कर विपक्ष में बैठाया है। अब धमकियों और खोखली बयानबाजी से छत्तीसगढ़ की शांतिप्रिय जनता या हमारी निष्पक्ष पुलिस व्यवस्था डरने वाली नहीं है।
*सरकार किसी उपद्रवी को नहीं बख्शेगी*
प्रदेश सह कोषाध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसी भी उपद्रवी को नहीं बख्शेगी, चाहे वह किसी भी दल से जुड़ा हो। पुलिस बल पूरी निष्पक्षता से अपना काम कर रहा है और आगे भी करता रहेगा। पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी मर्यादा याद रखनी चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं को धमकाने से बाज आना चाहिए।

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