महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर। रविवार को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 133वें एपिसोड का प्रसारण हुआ। विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने पारिवारिक वैवाहिक कार्यक्रम के बीच प्रधानमंत्री के मन की बात का श्रवण किया। इस बार भी प्रधानमंत्री ने अलग-अलग क्षेत्रों एवं विषयों के बारे में चर्चा की। सबसे पहले उन्होंने देश में चल रहे जनगणना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में इस समय एक बहुत अहम अभियान चल रहा है, जिसके बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी जरूरी है। ये है जनगणना का अभियान, यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है। जिन राज्यों में स्व-गणना का काम पूरा हो गया है, वहां घरों की लिस्टिंग का काम जारी है। अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों के मकान की लिस्टिंग का काम पूरा भी हो चुका है। उन्होंने बताया कि आप खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। आप अपने समय के अनुसार जानकारी भर सकते हैं। प्रक्रिया होने पर आपको एक विशेष आईडी मिलती है। ये आईडी आपके मोबाइल या ईमेल पर आती है। बाद में जब कर्मचारी आपके घर आता है, तो आप यही आईडी दिखाकर जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं। इससे दोबारा जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके साथ ही उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा को लेकर कहा कि मई महीने की शुरुआत एक पावन अवसर के साथ होने जा रहा है। कुछ ही दिनों में हम बुद्ध पूर्णिमा मनाएंगे। उन्होंने देशवासियों को अग्रिम शुभकामनाएं भी दी। आगे कहा कि भगवान गौतम बुद्ध ने हमें सिखाया है कि शांति हमारे भीतर से शुरु होती है, उन्होंने बताया है कि स्वयं पर विजय सबसे बड़ी विजय होती है।
अन्य विषयों पर की चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि कच्छ के रण में बरसात खत्म होते ही हर साल लाखों फ्लेमिंगो यहां आते हैं। पूरा इलाका गुलाबी रंग से रंग जाता है। इसलिए इसे फ्लेमिंगो सिटी कहा जाता है। साथ ही पवन ऊर्जा के बारे में कहा कि पवन-शक्ति भारत के विकास की नई कहानी लिख रही है। भारत ने हाल ही में पवन ऊर्जा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब भारत का विंड एनर्जी जनरेशन कैपेसिटी 56 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है। गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान देश के अनेक राज्य इस सेक्टर में अपना परचम लहरा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के बनाए कानून के हिसाब से बांस को पेड़ के रूप में परिभाषित किया गया था और इससे जुड़े नियम बहुत कड़े थे। कहीं पर भी बांस को ले जाना बहुत मुश्किल था। आगे कहा कि साल 2017 में कानून में बदलाव करके हमने बांस को पेड़ की कैटेगरी से बाहर किया। जिसके नतीजे सबके सामने हैं, आज पूरे नार्थ ईस्ट में बंबू सेक्टर फल फूल रहा है।


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