हरेली की रात गांव-गांव जाकर अंधविश्वास तोड़ेगी अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति - sanskar.live

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अगस्त 11, 2026

हरेली की रात गांव-गांव जाकर अंधविश्वास तोड़ेगी अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति

कोई नारी टोनही नहीं" अभियान रहेगा जारी, डॉ. दिनेश मिश्र ने दी जानकारी


संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर, महासमुंद, छत्तीसगढ़*  


*महासमुंद।* छत्तीसगढ़ में हरेली पर्व के अवसर पर भूत-प्रेत, टोनही और जादू-टोने को लेकर फैले भय एवं भ्रम को दूर करने के लिए *अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति* इस बार विशेष जनजागरण अभियान चलाएगी। समिति के सदस्य हरेली अमावस्या की रात गांवों और निर्जन स्थानों में रात्रि भ्रमण कर लोगों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।

समिति के अध्यक्ष *डॉ. दिनेश मिश्र* ने बताया कि हरेली के नाम पर ग्रामीण अंचलों में आज भी कई तरह की अंधमान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ स्थानों पर यह मान्यता है कि हरेली की रात विशेष साधना करने से जादुई शक्तियां प्राप्त होती हैं। इसी भ्रम को तोड़ने के लिए समिति ने "कोई नारी टोनही नहीं" अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है।

रात्रि भ्रमण और जनसंपर्क*  

डॉ. मिश्र ने बताया कि हरेली अमावस्या की रात समिति के कार्यकर्ता जिले के विभिन्न गांवों में जाएंगे। इस दौरान वे लोगों से सीधे संवाद कर यह समझाएंगे कि बीमारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य परेशानियों का कारण जादू-टोना नहीं, बल्कि अस्वच्छता और लापरवाही है। रात्रि भ्रमण के दौरान अंधविश्वास विरोधी पंपलेट और जागरूकता सामग्री वितरित की जाएगी। साथ ही टोनही प्रताड़ना के खिलाफ ग्रामीणों से शपथ भी दिलाई जाएगी।

टोनही प्रथा पर चोट*  

डॉ. मिश्र ने कहा कि पहले जब बीमारियों और संक्रमणों के वैज्ञानिक कारणों की जानकारी सीमित थी, तब कई बीमारियों को जादू-टोने या बुरी नजर से जोड़ दिया जाता था। कई बार बीमारी के लिए किसी महिला को जिम्मेदार ठहराकर उसे टोनही घोषित कर दिया जाता था। यह न केवल अंधविश्वास को बढ़ावा देता है बल्कि महिलाओं के साथ सामाजिक अन्याय और प्रताड़ना का कारण भी बनता है।  

उन्होंने स्पष्ट कहा कि *"कोई महिला टोनही नहीं होती और जादू-टोने का कोई वैज्ञानिक अस्तित्व नहीं है।"*

सावन में स्वास्थ्य पर जोर*  

डॉ. मिश्र ने सावन के मौसम में स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्षा, उमस और नमी के कारण इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं। गंदगी, दूषित पेयजल और दूषित भोजन के कारण गांवों में दस्त, आंत्र संक्रमण, पीलिया, वायरल बुखार और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।  

उन्होंने लोगों से अपील की कि बीमारी होने पर झाड़-फूंक कराने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। सांप या जहरीले कीड़े काटने की स्थिति में भी समय पर अस्पताल पहुंचना जरूरी है। हाथों की सफाई, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छ भोजन और मच्छर-मक्खी नियंत्रण ही बीमारियों से बचाव का असली उपाय है।

नीम की टहनियां तोड़ने के बजाय लगाएं पौधे*  

डॉ. मिश्र ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हरेली पर बच्चे और युवा नजर लगने से बचने के नाम पर नीम की टहनियां लेकर घूमते हैं। इससे पेड़ों को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने पालकों और शिक्षकों से आग्रह किया कि बच्चों को इस अंधविश्वास से दूर रखकर उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करें। नीम की टहनियां तोड़ने के बजाय घरों और सार्वजनिक स्थानों पर नीम सहित अन्य उपयोगी पौधे लगाए जाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण भी हो सके।

समिति का संदेश*  

अंत में डॉ. मिश्र ने कहा कि मक्खियां और मच्छर किसी भी कथित तंत्र-मंत्र से कहीं अधिक वास्तविक स्वास्थ्य जोखिम हैं। यदि लोग स्वच्छता और स्वास्थ्य के बुनियादी नियमों का पालन करें तो बीमारी से बचाव के लिए किसी अंधविश्वास की जरूरत नहीं पड़ेगी। समिति हरेली पर्व पर भी "कोई नारी टोनही नहीं" अभियान के तहत महिलाओं को टोनही के आरोप से बचाने और समाज में वैज्ञानिक चेतना फैलाने का काम करती रहेगी।

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