पुत्र पंकज चंद्राकर ने मानवता की मिसाल पेश की, 2 जरूरतमंदों को मिलेगी रोशनी
*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर।* राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत महासमुंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम पीढ़ी, लहंगर निवासी स्व. श्रीमती उत्तराबाई चन्द्राकर उम्र 65 वर्ष का नेत्रदान प्राप्त हुआ है। निधन के पश्चात उनके पुत्र श्री पंकज चन्द्राकर ने नेत्रदान का निर्णय लेकर मानवता की मिसाल पेश की। उनके इस पुनीत कार्य से दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद जगी है। सिटी नर्सिंग होम एवं आई केयर महासमुंद की नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. रितू बजाज द्वारा नेत्रदान की सूचना नेत्र विभाग महासमुंद को दी गई। इसके पश्चात डॉ. आई. नागेश्वर राव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, महासमुंद के निर्देशन तथा डॉ. बसंत महेश्वरी, संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। डॉ. अनिल कुमार गोरियार, नेत्ररोग विशेषज्ञ एवं नेत्रदान अधिकारी महासमुंद के नेतृत्व में मंगलवार को निजी चिकित्सालय सिटी नर्सिंग होम महासमुंद में स्व. श्रीमती उत्तराबाई चन्द्राकर का नेत्रदान प्राप्त किया गया। इस अवसर पर नेत्रदान दाता परिवार को उनकी स्मृति में अभिनंदन प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। नेत्रदान दल में श्री अवधेश कुमार यादव, श्री उमेश कुमार गोतमारे, नेत्र सहायक अधिकारी तथा श्री यशवंत निर्मलकर, वाहन चालक उपस्थित रहे। स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि नेत्रदान मानवता के लिए किया जाने वाला महान एवं पुण्य कार्य है। मृत्यु के पश्चात 6 घंटे के भीतर नेत्र ज्योति का संग्रहण किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में पूरी आंख नहीं निकाली जाती, बल्कि केवल आवश्यक नेत्र ऊतक (कॉर्निया) का संग्रहण किया जाता है। जिले के प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में नेत्र सहायक अधिकारी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यरत हैं। इनके माध्यम से नेत्र इकाई महासमुंद को सूचना देकर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है।

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