झलप से रायपुर तक संघर्ष कर रचा इतिहास, डॉक्टर बनकर गांव की सेवा करना है सपना
*महासमुंद। संस्कार न्यूज़। गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट
महासमुंद सस्कार न्यूज़ /राष्ट्रीय परीक्षा में लहराया परचम महासमुंद जिला अंतर्गत ग्राम बावनकेरा झलप निवासी साक्षी चंद्राकर ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-2026 में शानदार सफलता प्राप्त कर पूरे क्षेत्र के साथ-साथ कुर्मी समाज का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
साक्षी ने 720 अंकों की इस प्रतियोगी परीक्षा में 566 अंक प्राप्त कर पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है। साक्षी, श्री नागेश चंद्राकर एवं श्रीमती गीता चंद्राकर* की सुपुत्री हैं। साक्षी के माता-पिता झलप बाजार में रेडीमेड कपड़े की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
झलप से रायपुर तक का संघर्षमय सफर
साक्षी की सफलता आसान नहीं थी। इसकी नींव संघर्ष से रखी गई। साक्षी ने अपनी स्कूली पढ़ाई झलप, बागबाहरा और रायपुर में रहकर पूरी की है।
प्राथमिक शिक्षा गांव झलप में, आगे की पढ़ाई के लिए बागबाहरा* और फिर बेहतर तैयारी के लिए रायपुर में रहकर पढ़ाई की। घर से दूर रहकर, सीमित संसाधनों में साक्षी ने न केवल पढ़ाई की बल्कि अपने सपने को भी जिंदा रखा।
साक्षी ने बताया कि _"रायपुर में रहकर कोचिंग और सेल्फ स्टडी दोनों करना पड़ता था। कई बार घर की याद आती थी, लेकिन माता-पिता का सपना और अपना लक्ष्य याद करके मेहनत करती थी।"_
मेहनत और संस्कार का संगम*
दुकान के काम के साथ पढ़ाई का संतुलन बनाना साक्षी के लिए बड़ी चुनौती थी। सुबह माता-पिता का हाथ बंटाना और रात तक पढ़ाई करना उसकी दिनचर्या बन गई थी। बचपन से ही डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करने का संकल्प रखने वाली साक्षी की लगन आज रंग लाई।
पिता श्री नागेश चंद्राकर ने गर्व से कहा _"हम एक सामान्य दुकानदार हैं। बेटी ने घर से दूर रहकर पढ़ाई की और पहले प्रयास में ही NEET क्लियर कर हमारा और पूरे समाज का नाम ऊंचा कर दिया।"_
माता श्रीमती गीता चंद्राकर ने कहा _"बेटियों को पढ़ाने से पूरा घर और समाज आगे बढ़ता है। साक्षी ने यह साबित कर दिया।"_
समाज और गांव में खुशी की लहर*
साक्षी के शानदार परिणाम की खबर मिलते ही बावनकेरा झलप, बागबाहरा और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। कुर्मी समाज के पदाधिकारियों, शिक्षकों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने साक्षी के निवास पहुंचकर परिवार को बधाई दी।
समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि _"साक्षी ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो गांव की बेटियां भी किसी भी बड़े मुकाम को हासिल कर सकती हैं। यह अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा है।"_
*आगे का लक्ष्य: गांव की सेवा*
साक्षी का अगला लक्ष्य प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में MBBS में प्रवेश लेना है। साक्षी ने कहा _"मैं डॉक्टर बनकर सबसे पहले अपने झलप और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाना चाहती हूं। शहरों में तो सुविधाएं हैं, लेकिन गांवों में आज भी लोग इलाज के लिए भटकते हैं। मैं उनकी सेवा करना चाहती हूं।"_
साक्षी की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि संघर्ष और मेहनत से कोई भी मंजिल पाई जा सकती है।


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