जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से तंग आकर ग्रामीणों ने खुद बनाई तालाब की पचरी - sanskar.live

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जुलाई 21, 2026

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से तंग आकर ग्रामीणों ने खुद बनाई तालाब की पचरी

 पिथौरा के भगत देवरी में श्रमदान की मिसाल, सरपंच-उपसरपंच पर उठे सवाल


*पिथौरा संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर/ विकासखंड पिथौरा के ग्राम पंचायत भगत देवरी में जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और उदासीनता की वजह से ग्रामीणों को अपने ही गांव के विकास के लिए मोर्चा संभालना पड़ा। गांव के मुख्य तालाब की पचरी पिछले कई महीनों से जर्जर अवस्था में थी। बार-बार शिकायत के बाद भी सरपंच और उपसरपंच ने समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया। आखिरकार ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और श्रमदान से पचरी निर्माण कर एक मिसाल पेश की है।

कई बार शिकायत, नहीं हुआ समाधान*

ग्रामीणों के अनुसार गांव का तालाब सिंचाई और पशुओं के पीने के पानी का मुख्य स्रोत है। पिछले मानसून में तेज बारिश के कारण तालाब की पचरी जगह-जगह से दरक गई थी और कटाव शुरू हो गया था। इससे कभी भी पचरी टूटकर खेतों और घरों में पानी घुसने का खतरा था।

ग्रामवासियों ने बताया कि इस समस्या को लेकर वे *सरपंच और उपसरपंच के पास 4-5 बार गए*। पंचायत में भी मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार "फंड नहीं है, ऊपर से आदेश आएगा" कहकर टाल दिया गया।

ग्रामीण केशव पटेल ने कहा,  

_"हम लोग महीनों से चक्कर काट रहे थे। सरपंच जी को फोटो भी दिखाए, वीडियो भी दिखाया। लेकिन एक बार भी मौके पर आकर देखने तक नहीं आए। मजबूरन हमें खुद ही कुछ करना पड़ा।"_

*श्रमदान से लिखी विकास की नई इबारत*



जनप्रतिनिधियों से निराश होकर गांव के 6-7 जागरूक युवाओं और बुजुर्गों ने बैठक कर तय किया कि वे खुद ही पचरी की मरम्मत करेंगे। इसके बाद गांव में सहयोग की अपील की गई।

सामग्री सहयोग देने वाले ग्रामीण:*

- *विष्णु महापात्र* ने 4 बोरी सीमेंट 

- *नरेश निषाद* ने 500 ईंट 

- *अजय साहू* ने 3 ट्रॉली रेत का सहयोग दिया

*श्रमदान में जुटे ग्रामीण:*  

*केशव पटेल, साहराम यादव, सोहन लाला, भानु यादव, योगरामलाल* - बंनदुर्गा मंदिर के पुजारी, *दिलेश पटेल और ललित सिदार* ने 3 दिन तक लगातार मिट्टी भराई, पत्थर लगाने और सीमेंट का काम किया।

पुजारी योगरामलाल ने कहा,  

_"तालाब हमारे गांव की जान है। अगर ये टूट जाता तो सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती। भगवान के बाद अब हमें ही अपने गांव को बचाना था, इसलिए हम लोग जुट गए।"_

*ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन से कार्रवाई की मांग*

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत को हर साल लाखों का बजट मिलता है, फिर भी मूलभूत काम नहीं होते। 

ग्रामीण *साहराम यादव ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा,  

_"टैक्स देते हैं, वोट भी देते हैं। लेकिन जब काम की बारी आती है तो जनप्रतिनिधि मुंह फेर लेते हैं। अब तो हद हो गई। हमें खुद ईंट-सीमेंट खरीदकर काम करना पड़ रहा है। ये सरपंच-उपसरपंच की सबसे बड़ी नाकामी है।"_

भानु यादव* ने कहा,  

_"अगर आज हम लोग आगे नहीं आते तो बरसात में बड़ा नुकसान हो जाता। ये काम पंचायत का था, लेकिन पंचायत सो रही है। अब ग्रामीण ही अपना विकास खुद करेंगे।"_

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत से मांग की है कि भगत देवरी के सरपंच और उपसरपंच की कार्यशैली की जांच की जाए और लापरवाह जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई हो।

पंचायत की नाकामी उजागर*

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जमीनी स्तर पर जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। भगत देवरी के ग्रामीणों ने श्रमदान कर न सिर्फ तालाब को बचाया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि जनता चाहे तो व्यवस्था को भी आईना दिखा सकती है।

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