सांसद–शिक्षक संवाद में गूंजी टीईटी अनिवार्यता की पीड़ा, हजारों शिक्षकों ने सांसद रूपकुमारी चौधरी के समक्ष रखी अपनी बात - sanskar.live

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जुलाई 13, 2026

सांसद–शिक्षक संवाद में गूंजी टीईटी अनिवार्यता की पीड़ा, हजारों शिक्षकों ने सांसद रूपकुमारी चौधरी के समक्ष रखी अपनी बात

सांसद–शिक्षक संवाद में गूंजी टीईटी अनिवार्यता की पीड़ा, हजारों शिक्षकों ने सांसद रूपकुमारी चौधरी के समक्ष रखी अपनी बात
सांसद–शिक्षक संवाद में गूंजी टीईटी अनिवार्यता की पीड़ा, हजारों शिक्षकों ने सांसद रूपकुमारी चौधरी के समक्ष रखी अपनी बात
सांसद–शिक्षक संवाद में गूंजी टीईटी अनिवार्यता की पीड़ा, हजारों शिक्षकों ने सांसद रूपकुमारी चौधरी के समक्ष रखी अपनी बात
सांसद–शिक्षक संवाद में गूंजी टीईटी अनिवार्यता की पीड़ा, हजारों शिक्षकों ने सांसद रूपकुमारी चौधरी के समक्ष रखी अपनी बात



*महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर* /छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के तत्वावधान में रविवार को शंकराचार्य भवन में आयोजित "सांसद–शिक्षक संवाद" कार्यक्रम ऐतिहासिक बन गया। महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की माननीय सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी की उपस्थिति में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों शिक्षक एकत्रित हुए और टीईटी अनिवार्यता से उत्पन्न अपनी चिंताओं एवं समस्याओं को खुलकर साझा किया।


       सभी शिक्षकों के विचारों को गंभीरतापूर्वक सुनने के पश्चात अपने उदबोधन में मुख्य अतिथि के आसंदी से श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने सभी शिक्षकों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं एवं मांगों को उचित मंच तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भावनाओं और उनके योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए तथा इस विषय पर संबंधित स्तर पर सकारात्मक पहल करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही श्रीमती चौधरी ने कहा की शिक्षक अपने ज्ञान के दीपक से डॉक्टर, इंजिनियर, न्यायधीश, पुलिस, विधायक, सांसद सभी बनाते है और इससे बड़ा शिक्षक समाज में एक अच्छा इंसान बनाने का कार्य करते है। मैं आप सभी के विचारों को गंभीरता से सुनी हूँ और लम्बे समय से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे शिक्षको के अनुभव को एक परीक्षा से आकना व्यवहारिक नहीं है इस पर मैं अपनी पूरी बात सेवा सदन में रखूंगी।


        कार्यक्रम का शुभारंभ जिला अध्यक्ष ईश्वर चंद्राकर के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि उनकी जनप्रतिनिधि स्वयं उनके बीच उपस्थित होकर उनकी बात सुनने आई हैं। उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद सेवा कालीन शिक्षकों में गहरी चिंता और मानसिक तनाव का वातावरण है। उन्होंने बताया कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी, जब न तो शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ था और न ही टीईटी परीक्षा अस्तित्व में थी, उन्होंने उस समय की सभी वैधानिक योग्यताओं को पूरा कर विधिवत नियुक्ति प्राप्त की थी। ऐसे शिक्षकों पर वर्षों बाद टीईटी अनिवार्यता लागू होना न्यायसंगत नहीं है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि किसी सांसद द्वारा हजारों शिक्षकों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सीधे सुनना लोकतंत्र की सशक्त मिसाल है। उन्होंने कहा कि टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षक भय, असमंजस और मानसिक दबाव में हैं तथा इस विषय का संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण समाधान आवश्यक है।

इसी क्रम में सिराज बक्श ने कहा कि सामान्यतः देश में कानून बनने के बाद लागू होते हैं, लेकिन सेवा कालीन शिक्षकों के मामले में बाद में बने प्रावधानों का प्रभाव पूर्व नियुक्तियों पर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह उन शिक्षकों के साथ न्याय नहीं है जिन्होंने अपने नियुक्ति काल के सभी नियमों का पालन करते हुए वर्षों तक निष्ठापूर्वक सेवा दी है।

आदित्य साहू ने कहा कि शिक्षक न्याय की अपेक्षा लेकर अपनी सांसद के समक्ष पहुंचे हैं। उन्होंने आग्रह किया कि इस विषय को संसद एवं केंद्र सरकार के समक्ष गंभीरता से उठाया जाए ताकि सेवा कालीन शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

अनुशासन समिति प्रभारी  दिनेश नायक ने कहा कि आज शिक्षक उम्र के उस पड़ाव में है जहाँ पर परीक्षा दिला पाना संभव नहीं है जब हमारी नियुक्ति के समय शिक्षक पात्रता परीक्षा की शुरुआत नहीं हुई थी ऐसी परीक्षा को आखिर क्यों थोपा जा रहा है।

महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष श्रीमती दीपाली वर्मा ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा के पढ़ाए गई शिक्षकों के बदौलत अफसर बनने वाले वर्षों के शिक्षकीय अनुभव को एक पात्रता परीक्षा से माप रहे है।

ठीक है शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य होनी चाहिए परंतु जब से इसका जन्म हुआ तब से इसको लागू करना चाहिए इसके निर्माण से पहले शिक्षक बनने वाले साथियों को इससे मुक्त रखा जाना चाहिए।

कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के जिला संयोजक टेकराम सेन ने कहा कि एक शिक्षक के सालों का अनुभव एक पात्रता परीक्षा से कैसे मापा जा सकता है शिक्षा के अधिकार अधिनियम कानून में संशोधन कर सेवारत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से पूरी तरह से मुक्त किया जाना चाहिए।

संवाद के दौरान अनेक शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे वर्षों से विद्यार्थियों के हित में समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं, लेकिन टीईटी अनिवार्यता के कारण उनका भविष्य अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।

कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों ने सांसद महोदया का आभार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि उनकी पीड़ा संसद तक पहुंचेगी और सेवा कालीन शिक्षकों के हित में सकारात्मक समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता माननीय सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी जी को संगठन की तरफ से स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।

       इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता संदीप दीवान, युवाध्यक्ष अमन वर्मा अनुज पांडे भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन  प्रदेश प्रवक्ता हुलेश चंद्राकर ने किया और कार्यक्रम का संचालन जिला अध्यक्ष ईश्वर चंद्राकर ने किया।

       इस अवसर पर प्रमुख रूप से शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उमेश भारती गोस्वामी धमतरी जिला अध्यक्ष दौलत राम ध्रुव प्रदेश पदाधिकारी राजा राम पटेल प्रदीप पटेल  आदित्य गौरव साहू सिराज बक्श जिला सचिव विनय यादव बीपी मेश्राम महेंद्र बघेल ब्लॉक अध्यक्ष द्वय बाबूलाल ध्रुव कमलेश नायक प्रकाश बघेल शरण दास महिला प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष श्रीमती दीपाली वर्मा महिला प्रकोष्ठ ब्लॉक अध्यक्ष द्वय श्रीमती मुनिया निर्मलकर श्रीमती रश्मि चंद्राकर जिला उपाध्यक्ष श्रीमति सीमा यादव पुरुषोत्तम चंद्राकर विजय राजपूत मिडिया प्रभारी बलराम नेताम, अमित उइके श्रीमती नूतन दुबे श्रीमती लीना पांडे श्रीमती लीना चंद्राकर श्रीमती सुनीता ध्रुव  श्रीमती गोमती साहू  श्रीमती विद्या वर्मा श्रीमती प्रतिभा साहू राजेश भालेराव राजेश चंद्राकर आत्मा राम साहू अजय बंजारे लोकेश्वर मोगरे विष्णु जागृति जितेंद्र साहू यश चक्रधारी जितेन्द्र साहू भूपेंद्र दीवान सार्वेद्र महानदिया खुमान ध्रुव डिकेश्वर साहू संदीप दीवान  विजय राजपूत असलम खान शफीक अहमद खान योगेश्वर चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित थे। उक्त जानकारी जिला सचिव विनय यादव और जिला मिडिया प्रभारी बलराम नेताम ने दिया।





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