महासमुंद संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर :- छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति की आरक्षण को 16 प्रतिशत से घटाकर 13 प्रतिशत किए जाने से अनुसूचित जाति के लोग नाराज व आक्रोशित हैं। जबकि अविभाजित मध्यप्रदेश व पृथक छत्तीसगढ़ में 2013 के पहले 16 प्रतिशत आरक्षण मिल रही थी जिसे आरक्षण संशोधन विधेयक 2012 में आरक्षण प्रतिशत में निराधार संशोधन करते हुए पूर्व सरकार द्वारा 12 प्रतिशत कर दिया गया था। जिसे पूर्ववत बहाल करने की घोषणा पत्र का चुनाव प्रचार प्रसार में कांग्रेस पार्टी द्वारा करके सत्ता प्राप्त किया। परंतु वर्तमान में कैबिनेट की बैठक में 2011 की जनगणना के आधार पर 13 प्रतिशत लागू करने की प्रस्ताव पारित किया गया है। जो अनुसूचित जाति वर्ग के साथ भेदभाव है।जिसके विरोध में अनुसूचित जाति के सभी समाज के लोगों द्वारा संयुक्त रूप से 30 नवंबर 2022 को महासमुंद जिला मुख्यालय के लोहिया चौक में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया
जहां पर अपने उद्बोधन में लक्ष्मण भारती ने कहा कि संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहकर वोट की महत्व को समझें। साथ ही मांग किया गया की वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग की जनसंख्या 18 से 20 प्रतिशत हो गई है। चूंकि 2021 में जनगणना होना था परंतु कोरोना की वजह से नहीं हो पाई है परंतु वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग की जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई है इसलिए वर्तमान जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जाति वर्ग की आरक्षण को 16 प्रतिशत करने की मांग की गई जिसके बाद आक्रोश रैली निकाली गई जो लोहिया चौक से कलेक्ट्रेट तक पहुंच कर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री व अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के नाम से ज्ञापन सौंपने के लिए आधे घंटे तक कलेक्ट्रेट के सामने डटे रहे और जमकर नारेबाजी की गई
आगे प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के जिला मीडिया प्रभारी सोमनाथ टोंडेकर बताया की राज्य सरकार अनुसूचित जाति वर्ग की मांगों पर विचार नहीं करती तो जल्द ही पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक आंदोलन करने का समाज द्वारा निर्णय लिया गया है जिसकी शुरुआत महासमुंद जिले से हो चुकी है।
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