त्रिभुवन ताम्रकार (गरियाबंद) । कथावाचक पंडित रामानुज अमलीपदर जगन्नाथ मंदिर के पुजारी हैं मंदिर से जब भगवान को रथ पर बैठाया जाता है तो उस के समय का माहौल पूरा कलियामय हो जाता है। उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र ओड़िसा लगा है और पुरी सहित पूरे ओडिशा मैं भगवान जगन्नाथ को दुकान पर उनके काले रंग के अनुरूप कालिया भगवान का ही संबोधन दिया है। पंडित कंधे पर भगवान को लेकर निकले तो महज 50 मीटर नको दूरी तप करने में उन्हें 1 घंटा लगा ।
बोल कालिया के जयकारों से गूंजा अमलीपदर
पुजारी भगवान को अपने कंधे पर लेकर झूमते हैं, भक्त भगवान एक सुर ताल में लीन नजर आते हैं। बाजे का था व भक्तों की बोली से केवल "बोल कालिया" निकलता है। इस नजारे को देखने मंदिर परिसर से लगी छत पर सैकड़ों श्रद्धालुओ मौजूद रहते हैं। नगर प्रवेश करने वाली सभी गलियों में लाइटिंग के अलावा माइक लगाया गया है ताकि सुबह शाम होने वाली महाप्रभु की आरती का गुजायमान नगर भर में हो।