संस्कार न्यूज रायगढ़ :- हर माता पिता की आंखों में अपने बच्चे के सुनहरे भविष्य का सपना होता है। अपने बच्चे को स्कूल भेजना, बस पर चढ़ाते वक्त, या स्कूल गेट पर छोड़ते वक्त उन्हें इस बात को भरोसा होता है की उनका बच्चा एक ऐसी जगह जा रहा है जहां उसे घर से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। जहां वो खेल कुद और शैतानियों के साथ कुछ नया सिखेगा, कुछ ऐसा जिससे उसका भविष्य बनेगा लेकिन अब ये हालात नहीं है। हर माता पिता अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने से पहले अपना फोन हाथ से नहीं छोड़ते। उनका ध्यान अपने काम पर कम और फोन पर ज्यादा होता है। हर समय माता पिता के दिल में डर बैठा रहता है कि कहीं स्कूल से किसी दुर्घटना की खबर ना आ जाए। वर्तमान समय में हो रही घटनाओं ने अभिभावकों को स्कूलों में अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए चिंतित कर दिया है।
शिक्षकों का रोल
स्कूल में बच्चों की सुरक्षा का ख्याल रखने में सबसे अहम् जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है।शिक्षकों को स्कूल के सुनसान जगहों पर समय-समय पर चेक करते रहना चाहिए। साथ ही स्कूल के शिक्षकों द्वारा और स्कूल प्रशासन द्वारा औचक निरीक्षण भी किए जाने चाहिए। इसके साथ ही बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में भी बताया जाना चाहिए। साथ ही किसी भी तरह की दिक्कत होने के तुरंत बाद बच्चे शिक्षकों या अभिभावकों से निडर होकर समस्या बता पाएं ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए।
अभिभावकों का रोल
माता-पिता को अपने बच्चों को शुरू से ही ये सीखा देना चाहिए कि किसी भी तरह की परेशानी हो तो सीधा उनतक अपनी शिकायत पहुंचाएं। साथ ही किसी भी तरह के शोषण का सामना डटकर करें। इसके साथ ही सरकारों द्वारा स्कूल प्रशासन और अभिभावकों तक साइबर-सुरक्षा और बदमाशी के खिलाफ उठाए जा सकने वाले कदम और कानूनों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। सौ बातों की एक बात ये है कि सुरक्षा एक अहम मुद्दा है और स्कूलों को सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त करने के लिए किसी घटना के होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
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