विद्वानों ने कहा - सरल भाषा के कारण मानस बना जन-जन का ग्रंथ, प्रतिदिन पाठ से मिलती है आध्यात्मिक ऊर्जा*
_पिथौरा संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर की रिपोर्ट।_ श्रीथानेश्वर मंदिर परिसर पिथौरा में बुधवार को गोस्वामी तुलसीदास जयंती धूमधाम एवं श्रद्धा भाव के साथ मनाई गई। भगवान श्रीराम, श्रीरामचरित मानस और हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्प अर्पित कर संत तुलसीदास को नमन किया गया।
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्राचार्य _अनूप दीक्षित_ ने मुख्य वक्ता के रूप में गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन वृत्तांत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी ने रामचरित मानस की रचना इतनी सरल और ग्राह्य भाषा में की है कि यह जन-सामान्य का ग्रंथ बन गया। निरक्षर व्यक्ति भी मानस की चौपाइयों और छंदों को आसानी से गुनगुनाता है। उनकी रचनाएं समाज को नैतिकता, मर्यादा और भक्ति का मार्ग दिखाती हैं।
प्रवचनकार _परमेश्वर डडसेना_ ने तुलसीदास जी का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए रामचरित मानस को "पांचवां वेद" की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि राम और रामचरित मानस दोनों ही सनातनियों की आत्मा में बसे हुए हैं। मानस के पाठ से घर-परिवार में सुख-शांति आती है और समाज में सद्भाव बढ़ता है।
कार्यक्रम के मार्गदर्शक _श्री उमेश दीक्षित_ ने कहा कि "गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने लेखन से सनातन धर्म को नई दिशा दी। रामचरित मानस आज भी हर घर में पूज्य है। मंदिर में प्रतिदिन होने वाला मानस पाठ इस बात का प्रमाण है कि आज भी लोग मानस से प्रेरणा ले रहे हैं। युवाओं को तुलसीदास जी के आदर्शों को अपनाकर समाज में मर्यादा और संस्कार बढ़ाने चाहिए।"
थानेश्वर मंदिर में प्रतिदिन की भांति इस अवसर पर भी सामूहिक रूप से रामचरित मानस का पाठ किया गया। भजन-कीर्तन और हनुमान चालीसा के गायन से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और तुलसीदास जी के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में _पं. कृष्ण कुमार शर्मा, पं. मेवालाल दुबे, पं. कमल शर्मा, जयकुमार पैंकरा, मनीराम नायक, समार गिर गोस्वामी, पुनीत गिर गोस्वामी, विजय निषाद, मनीष गजेंद्र, कामेश्वरी गजेंद्र, नरेश महंती, सोमनाथ यादव, योगेश यादव_ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सम्पूर्ण कार्यक्रम _श्री उमेश दीक्षित जी_ के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। मंदिर समिति ने सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।



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