सद्भाव और सामाजिक पुनर्जागरण का प्रतीक 'गुरु पर्व सतनाम मेला': विधायक डॉ. संपत अग्रवाल - sanskar.live

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दिसंबर 02, 2025

सद्भाव और सामाजिक पुनर्जागरण का प्रतीक 'गुरु पर्व सतनाम मेला': विधायक डॉ. संपत अग्रवाल

 गढ़फुलझर में आयोजित भव्य 'गुरु ज्ञान प्रकाश पर्व', विधायक डॉ संपत अग्रवाल ने कहा-सत्य, समानता और मानवता ही सतनामी समाज की पहचान

*गुरु ज्ञान प्रकाश पर्व संत समागम: विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने सतनाम मेला को बताया 'समाज के गौरव और संस्कृति के पुनर्जागरण का अवसर'*

*"मानव-मानव एक समान" के मार्ग पर चलें युवा: बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने सतनाम मेले में दिया गुरु घासीदास जी का संदेश*

*बसना में 'सतनाम मेला' का भव्य आयोजन: विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने गुरु घासीदास बाबा जी के आदर्शों पर किया प्रकाश*








*बसना संस्कार न्यूज गौरव चंद्राकर/बसना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गढ़फुलझर में कैबिनेट मंत्री एवं सतनामी समाज के युवराज धर्म गुरु खुशवंत सिंह साहेब जी के सानिध्य और मार्गदर्शन में 'गुरु ज्ञान प्रकाश पर्व संत समागम सतनाम मेला' का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल और कार्यक्रम की अध्यक्षता बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने की।


*गुरु पर्व: सामाजिक गौरव और संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रेरणादायी अवसर*

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने उपस्थित जनसमूह को गुरु पर्व सतनाम मेला की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी। उन्होंने अपने सारगर्भित उद्बोधन में इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दिवस हम सभी के लिए न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि समाज के गौरव, संस्कृति के पुनर्जागरण और आदर्श जीवन-मूल्यों को अपनाने का प्रेरणादायी अवसर भी है।

विधायक डॉ. अग्रवाल ने बल देते हुए कहा कि सतनाम मेला सदियों से सतनामी समाज की पहचान, एकता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक रहा है। यह महान परंपरा हमें सत्य, अहिंसा, समानता, परिश्रम और मानवता के उच्च आदर्शों की याद दिलाती है, जो इसके केंद्र में निहित हैं।

*"सतनाम बोली हरि का नाम": सत्य, समानता और समाज-सुधार का संदेश*

विधायक डॉ. अग्रवाल ने सतनामी समाज के आराध्य गुरु—गुरु घासीदास बाबा जी के जीवन और दर्शन पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि गुरु बाबा जी ने समाज को "सत्य को ही ईश्वर" मानने की सीख दी। "सतनाम बोली हरि का नाम"— यह वाक्य मात्र एक धार्मिक मंत्र नहीं है, बल्कि जीवन को सरल, पवित्र और समता-भाव से भरने का एक शाश्वत संदेश है।

उन्होंने बताया कि गुरुजी का पूरा जीवन संघर्ष और समाज-सुधार की कहानी है। उन्होंने समाज को जाति-भेद, अंधविश्वास, अन्याय और शोषण से मुक्त कर मानवता, समानता और नैतिकता का मार्ग दिखाया। डॉ. अग्रवाल ने जोर दिया कि गुरुजी के उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।

*सामाजिक चेतना का उत्सव है सतनाम मेला*

विधायक डॉ. अग्रवाल ने कहा कि सतनाम मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है बल्कि यह "सामाजिक चेतना का उत्सव" है। उन्होंने कहा कि यह वह मंच है जहाँ लोग दूर-दूर से आकर मिलते हैं, विचार साझा करते हैं, संस्कृति का आदान-प्रदान करते हैं, और गुरु परंपरा की सीखों को जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं।

मेले के स्वरूप का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि इस मेले में लोकगीत, संस्कृति, परंपराएँ, कला और समाज की एकजुटता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह समाज को संगठित, सशक्त और जागरूक बनाने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

*वर्तमान चुनौतियों का समाधान: मानव-मानव एक समान*

विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने वर्तमान सामाजिक चुनौतियों, जैसे—शिक्षा, रोजगार, नशा-मुक्ति, सामाजिक सौहार्द और नेतृत्व विकास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास बाबा जी की शिक्षाएँ हमें इन चुनौतियों में सही दिशा प्रदान करती हैं। उन्होंने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि मानव-मानव एक समान का मार्ग आज की पीढ़ी के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। युवा वर्ग को गुरुजी की तपस्या, सरलता और कर्मवाद से प्रेरणा लेनी चाहिए और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

*भविष्य की पीढ़ियों के लिए संकल्प*

अपने वक्तव्य के समापन पर विधायक डॉ. अग्रवाल ने सभी से एक महत्वपूर्ण दायित्व निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम सबका दायित्व है कि गुरु पर्व सतनाम मेला जैसे आयोजनों को केवल एक उत्सव न मानकर, सामाजिक जागृति और आत्म-सुधार का अवसर बनाएं। हमें अपने बच्चों को सतनाम संस्कृति, गुरु परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना होगा ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व करें और समाज की उन्नति के लिए कार्य करें।

विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने अंत में गुरु घासीदास बाबा जी की कृपा और आदर्शों के जीवन में प्रकाश की तरह पथ प्रदर्शित करने की प्रार्थना की और कामना की कि यह पावन मेला समाज की एकता, प्रेम और सद्भाव को और मजबूत करे।

इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष येतराम साहू, जिला महामंत्री जितेंद्र त्रिपाठी, राजमहंत पी. एल. कोसरिया, तरेकेला कबीर कुटी आश्रम लखन मुनि साहेब, विधानसभा संयोजक एन के अग्रवाल, पिथौरा जनपद अध्यक्ष ऊषा पुरुषोत्तम धृतलहरें, जिला पंचायत सदस्य कुमारी भास्कर,बसना जनपद उपाध्यक्ष मोहित पटेल, जनपद सदस्य पुरुषोत्तम धृतलहरें, जनपद सदस्य मधु खूंटे, ग्राम पंचायत गढ़फुलझर सरपंच हरप्रीत कौर, मंदिर समिति पूर्व अध्यक्ष सुवर्धन प्रधान, युवा प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष डिग्रीलाल रात्रे,जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि खोलबाहरा निराला, अभय धृतलहरे, संचालन लखन कुर्रे, पंथी नृत्य में उपराष्ट्रपति से सम्मानित रोहित कोसरिया, कार्यक्रम संयोजक अध्यक्ष  मिलाप निराला, सचिव कुशल रात्रे, कार्यक्रम आयोजन समिति के सदस्यगण डिजेंद्र कुर्रे, डॉ मनीष भारद्वाज, अजीत महिलांगे, लिलेश्वर कोसरिया, हेमंत मिरी, जीवन रात्रे, किर्तो मिरी, संत लाभोदास संत रिपु दास, जवाहर लहरे, नरेंद्र रात्रे, लोकनाथ खूंटे, संतराम कुर्रे, ताजाराम खूंटे, बाबूलाल काशी, समाज सेवी उड़ीसा प्रांत रामप्रसाद ओंगरे, नरेंद्र बोरे, समाज के संत, महंत, सामाजिक प्रतिनिधि, युवा साथी, मातृशक्ति, संत समाज सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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