राज्योत्सव के समापन अवसर पर नवा रायपुर में फुलझर अंचल के सपूत डॉ. चित्तरंजन कर राज्य अलंकरण से हुए सम्मानित - sanskar.live

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नवंबर 07, 2025

राज्योत्सव के समापन अवसर पर नवा रायपुर में फुलझर अंचल के सपूत डॉ. चित्तरंजन कर राज्य अलंकरण से हुए सम्मानित

राज्योत्सव के समापन अवसर पर नवा रायपुर में फुलझर अंचल के सपूत डॉ. चित्तरंजन कर राज्य अलंकरण से हुए सम्मानित




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सरायपाली संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर /उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने 5 नवंबर राज्योत्सव के समापन अवसर पर नवा रायपुर में डॉ. चित्तरंजन कर को हिंदी एवं अंग्रेजी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पं. सुंदरलाल शर्मा सम्मान से सम्मानित किया। इस समारोह में मंच पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय,  विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल मौजूद थे।भारत के प्रख्यात भाषाविद, साहित्यकार, संस्कृतिविद, शिक्षाविद व संगीतकार डॉ. चित्तरंजन कर का जन्म महासमुंद जिले के सरायपाली तहसील में स्थित ग्राम पैकिन में हुआ था। उनके पिता स्व. दिवाकर कर शासकीय शिक्षक थे। डॉ. कर ने अपनी संपूर्ण स्कूली शिक्षा ग्राम पैकिन से ही प्राप्त की।  वे सरायपाली तहसील के विभिन्न शासकीय प्राथमिक शालाओं में 6 वर्ष तक  शिक्षक थे। तीन विषयों में एम.ए., पी.एच.डी.,  डि.लीट्. डॉ. कर ने राजीवलोचन महाविद्यालय, राजिम में रहते हुए पं. सुंदरलाल शर्मा के साहित्य पर कार्य किया। बाद में वे पं. सुंदरलाल शर्मा  शोधपीठ, रायपुर के अध्यक्ष रहे। इस दौरान अनेक गोष्ठियों का उन्होंने आयोजन किया और पं. सुंदरलाल शर्मा पर केंद्रित एक पुस्तक का संपादन भी उन्होंने किया। कुछ वर्षों पूर्व ही छत्तीसगढ़ी दानलीला का हिंदी अनुरचना करके उन्होंने पं. सुंदरलाल शर्मा साहित्य को राष्ट्रीय ख्याति दिलाई। भारत में आजादी के बाद हुए पहले भाषा सर्वेक्षण का छत्तीसगढ़ी और आदिवासी भाषाओं वाला खंड डॉ. कर ने ही तैयार किया, जिसका विमोचन नई दिल्ली में राष्ट्रपति जी ने किया था। छत्तीसगढ़ी भाषा पर यह महत्वपूर्ण कार्य है। इसके पहले भी छत्तीसगढ़ी की व्याकरणिक कोटियाॅं, बोलचाल की छत्तीसगढ़ी, और छत्तीसगढ़ी व्याकरण पर उनकी महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं। 

पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के साहित्य एवं भाषा अध्ययनशाला में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, कला संकायाध्यक्ष रहते हुए डॉ. कर ने भाषाविज्ञान, संस्कृत, हिंदी, छत्तीसगढ़ी, तथा अंग्रेजी में कुल 28 पीएचडी, 1 डि.लिट्  (हिंदी) शोध निर्देशन किया। उन्होंने कुल 37 पुस्तकों व 250 शोध पत्रों का लेखन किया। 2023 में महाकवि गंगाधर मेहेर विरचित उड़िया महाकाव्य की हिंदी अनुरचना प्रणय वल्लरी का प्रकाशन भारतीय भाषा केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा किया गया। रायपुर आकाशवाणी व दूरदर्शन से सैकड़ो वार्ताएं, परिचर्चाऐं, साक्षात्कार, चिंतन का प्रसारण हो चुका है। डॉ. कर ने छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा वर्ष 2009 व 2020 में छत्तीसगढ़ी राजभाषा सम्मान प्राप्त किया। 2022 में अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारतीय गौरव सम्मान उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा प्रदान किया गया। 2023 में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने एक भारत श्रेष्ठ भारत सम्मान से डॉ. कर को सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ राजभाषा विधेयक -28 नवंबर 2007 हेतु डॉ. कर छत्तीसगढ़ विधानसभा में विशेषज्ञ सलाहकार थे। वर्तमान में डॉ. कर को केंद्रीय गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा रेल मंत्रालय (रेल बोर्ड) की हिंदी सलाहकार समिति का सदस्य नामित किया गया है। उल्लेखनीय है कि एक ही जीवन में तीन विषयों के प्रोफेसर होने का रिकॉर्ड भी डॉ. कर के नाम से दर्ज है। वे पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में साहित्य भाषा अध्ययनशाला में हिंदी, अंग्रेजी, व भाषाविज्ञान विषयों के प्रोफेसर, अध्यक्ष,  तथा अधिष्ठाता कला संकाय के पद से निवृत हुए। फिर आप गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर में अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विभाग के मानद् प्रोफेसर रहे और उसके बाद उड़ीसा केंद्रीय विश्वविद्यालय कोरापुट में अंग्रेजी विभाग के कंसल्टेंट प्रोफेसर तथा कला संकाय के अधिष्ठाता रह चुके हैं। डॉ. कर कामधेनु विश्वविद्यालय अंजोरा एवं भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलगीतों के रचनाकार भी हैं। हिंदी, संस्कृत, छत्तीसगढ़ी, अंग्रेजी, और उड़िया भाषा पर उनकी समान पकड़ है। ऐसे विद्वान से सम्मान भी स्वयं सम्मानित हो जाता है।

डॉ. कर को वर्ष 2025 का राज्य अलंकरण सम्मान प्राप्त होने पर सरायपाली क्षेत्र के समस्त वरिष्ठ शिक्षाविद् , शासकीय महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संध्या भोई एवं समस्त महाविद्यालयीन परिवार, सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ. पितांबर साहू, छत्तीसगढ़ महिला आयोग की सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया, क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी तिलक प्रसाद साहू, शेषाचार्य जी महाराज,  प्रखर अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, विजय अग्रवाल, प्रदीप गुप्ता, रोमी सलूजा, डॉ. अमिताभ पॉल, राजेश मित्तल, जन्मजय नायक, फौजी धर्मेंद्र चौधरी, सेवा शंकर अग्रवाल, एवं डॉ. कर के पुराने साथियों ने प्रसन्नता व गर्व व्यक्त किया है।


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November 07, 2025 at 07:57PM

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