बीमार को सलाख ,अगरबत्ती से दागना इलाज नहीं.अंधविश्वास है -डॉ.दिनेश मिश्र,ग्रामीण अंधविश्वास में न पड़ें - sanskar.live

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मई 15, 2023

बीमार को सलाख ,अगरबत्ती से दागना इलाज नहीं.अंधविश्वास है -डॉ.दिनेश मिश्र,ग्रामीण अंधविश्वास में न पड़ें



संस्कार न्यूज़ गौरव चंद्राकर
/अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने कहा  ग्रामीण अंचल से इलाज के नाम पर बच्चों को गर्म सलाख और अगरबत्ती से दागना  के मामले सामने आए है जबकि यह अंधविश्वास है ऐसे बैगाओं पर कार्यवाही होना चाहिए.

डॉ दिनेश मिश्र ने बताया कुछ दिनों पूर्व महासमुंद जिले के मोहगांव और  बड़ेदाभा गांव के दो 15 व 20 दिन के नवजात शिशुओं को   बीमारी की झाड़फूंक करने के नाम पर गर्म सलाख और जलती अगरबत्ती से दागे जाने की घटना हुई है जिसमे एक बच्चे को 12 बार गर्म सलाख से दागा गया है ,वहीं दूसरे बच्चे को 6 बार.जिनसे उनकी हालत और बिगड़ गयी और उन्हें अस्पताल भेजना पड़ा.

डॉ मिश्र ने बताया जानकारी के अनुसारनीलमणि बारिक की 17 अप्रेल को जन्म ली बच्ची सौम्या बारिक को अपच,पेटदर्द का इलाज करने के लिए बैग ने नाभि के चारों ओर दागा जिससे बच्ची की तकलीफ और बढ़ गयी उसी प्रकार मोहगांव में पुरंदर साहू के घर 13 अप्रेल को जन्मी बच्ची को पेट फूलने की  बीमारी से निजात दिलाने नाभि के चारों ओर कई बार गर्म सलाख से दागने की घटना हुई है.बाद में तबियत बिगड़ने पर बच्चों को अस्पताल भेज गया .

डॉ दिनेश मिश्र ने कहा नवजात शिशुओं को दागने की घटनाएं अकसर सामने आती है .ग्रामीण  शिशु के दूध न पीने, अत्यधिक रोने, बुखार, दस्त, पीलिया होने,जैसी  समस्याओं के निदान के लिए दागे जाने के समाचार अक्सर मिलते हैं जिससे शिशु की तबियत और अधिक खराब हो जाती है.और कई बार समय पर उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध न होने पर उनकी मृत्यु भी हो जाती  है.देवभोग से भी कुछ समय पहले पीलिया के इलाज के लिए  बैगाओं  द्वारा सौ से अधिक बच्चों को गर्म चूड़ी से दागने की खबर आई थी,जिसमें अनेक बच्चों की मृत्यु घाव,संक्रमण बढ़ने से हुई थी.लोहे के हंसिये से दागने के भी अनेक मामले आते रहते हैं जबकि यह सब  अवैज्ञानिक, तथा उचित नहीं है.

डॉ दिनेश मिश्र ने कहा  कुछ नवजात शिशुओं में प्रारंभिक दिनों में कुछ समस्याएं आती है ,रात में जागना,बार बार रोना, गैस,अपच,पेट दर्द,पीलिया, बुखार,उल्टी करना,पर इन सब के लिए उस मासूम शिशु का उचित जॉंच और इलाज किसी प्रशिक्षित चिकित्सक से करवाना चाहिए .बीमारियों के अलग अलग कारण होते हैं जिनका जाँच, परीक्षण से उपचार होता है . स्व उपचार ,झाड़ फूँक, दागने,  गण्डा, ताबीज पहिनने, नजर उतारने आदि से  बीमार को  बीमारी से निजात कैसे दिलायी जा सकती है,बल्कि बच्चा और बीमार हो सकता है.और उसकी हालत बिगड़ सकती है.ग्रामीणों को इस प्रकार  किसी भी अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए बल्कि अपने आस पास  के किसी योग्य व्यक्ति कापरामर्श लेना चाहिए.



डॉ दिनेश  मिश्र

अध्यक्ष अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति

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